उमरिया के आदिवासी गांव में गहराया जल संकट, तीन किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर ग्रामीण

 


उमरिया, 06 जून (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के उमरिया जिले में भीषण गर्मी के बीच आकाशकोट क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत माली में पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है। गांव के सैकड़ों ग्रामीण रोजाना पीने के पानी के लिए करीब तीन किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता तय करने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं दिनभर पानी जुटाने में ही लगे रहते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत एक कुआं है, जो आबादी से काफी दूर घाटी क्षेत्र में स्थित है। पानी भरने के लिए लोगों को पहले तीन किलोमीटर नीचे उतरना पड़ता है और फिर भारी बर्तनों में पानी लेकर दुर्गम चढ़ाई चढ़कर वापस गांव पहुंचना पड़ता है।

गांव की बुजुर्ग महिला इन्द्राणा बाई बताती हैं कि बढ़ती उम्र के कारण पानी लाना बेहद मुश्किल हो गया है, लेकिन मजबूरी में यह काम रोज करना पड़ता है। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों को समस्या बताई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

ग्रामीण सुंदर सिंह के मुताबिक गांव में न केवल पीने के पानी की कमी है, बल्कि नहाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए भी लोगों को तालाब के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गांव की नल-जल योजना भी लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।

इमरती बाई का कहना है कि गांव की महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक पानी जुटाने में लगे रहते हैं। पीने के पानी के लिए कुएं तक जाना पड़ता है, जबकि नहाने और अन्य कार्यों के लिए दूर स्थित तालाब का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीण गनेसिया बाई ने बताया कि पानी की कमी के कारण कई बार स्कूलों में भी लंबी कतारों में खड़े होकर पानी भरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गांव में जल संकट अब लोगों के दैनिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।

मामले को लेकर जब जिला कलेक्टर राखी सहाय से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही एसडीएम बांधवगढ़ और राजस्व अमले को स्थिति की जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि गांव में पेयजल संकट की पुष्टि होती है तो तत्काल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

गौरतलब है कि प्रदेश में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन माली गांव की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें रोजाना पानी के लिए कठिन संघर्ष न करना पड़े।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी