राजगढ़ः 700 साल पुरानी होड़ा माता, सीमा अलग, आस्था एक
राजगढ़, 30 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पहचान ‘देवधरा’ के रूप में ऐसे ही धार्मिक स्थलों से बनी है। जिले के दंड गांव की पहाड़ियों के बीच स्थित होड़ा माता मंदिर इसका जीवंत उदाहरण है। राजस्थान सीमा से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश और राजस्थान के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर करीब 700 साल पुराना है। यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विजयासन स्वरूप की मान्यता, इसलिए पड़ा होड़ा माता नाम स्थानीय जनश्रुति के अनुसार मंदिर में मां दुर्गा के विजयासन स्वरूप की पूजा होती है।
मान्यता है कि महिषासुर और रक्तबीज जैसे राक्षसों का वध करने के बाद माता ने पहाड़ी पर आसन ग्रहण किया था। विजय के आसन पर विराजमान होने से उन्हें विजयासन माता कहा गया। समय के साथ स्थानीय लोकपरंपरा में यही दरबार होड़ा माता के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
बुजुर्गों और पुजारियों के अनुसार करीब सात शताब्दी पहले यह इलाका घने जंगल और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा था। उस समय यहां छोटी पिंडी या चबूतरे पर माता की पूजा होती थी। दंड सहित आसपास के ग्रामीण और चरवाहे माता को अपना रक्षक मानकर पूजा करते रहे। पीढ़ियों की आस्था के साथ यह स्थान धीरे-धीरे बड़े धार्मिक केंद्र में बदल गया।
पहाड़ी पर मंदिर होने से पहले यहां पहुंचना आसान नहीं था। श्रद्धालुओं ने जनसहयोग से करीब 200 सीढ़ियों का निर्माण और सुधार कराया। मध्यप्रदेश और राजस्थान के ग्रामीणों ने मिलकर राशि जुटाई और मंदिर तक पहुंचने का मार्ग तैयार किया। यही सीढ़ियां आज दोनों राज्यों के लोगों की साझा आस्था और सामुदायिक एकता की कहानी कहती हैं। प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित होड़ा माता मंदिर आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। सात सदियों से चली आ रही आस्था और दो राज्यों को जोड़ता यह धार्मिक स्थल ‘देवधरा राजगढ़’ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक