सीहोर में क्लोरीन गैस लीक, 10 लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत

 


वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में टैंक से रिसाव का दावा, तीन सिलेंडर हटाए

सीहोर, 11 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के लसूड़िया खास गांव में काहिरी बांध के पास स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में गुरुवार देर रात एक बार फिर क्लोरीन गैस रिसाव से हड़कंप मच गया। टैंक में लीकेज के बाद गैस आसपास फैलने से ग्रामीणों और राहगीरों को आंखों में तेज जलन, घुटन, सांस लेने में परेशानी और उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। करीब 10 लोग उपचार के लिए सीहोर जिला अस्पताल पहुंचे। इनमें पांच को देर रात भर्ती किया गया, जबकि कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। भर्ती मरीजों में एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरिओम गुप्ता ने बताया कि लसूड़िया खास से करी 10 मरीज आपातकालीन विभाग में उपचार के लिए पहुंचे थे। प्रेमजी, अनमोल, रामसभा, केसर सिंह और प्रेम सिंह को भर्ती किया गया। मरीजों का उपचार किया गया और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। नगर पालिका सीहोर के सीएमओ सुधीर सिंह के मुताबिक, ग्रासिम कंपनी नागदा की तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया। टीम ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में रखे तीनों क्लोरीन सिलेंडरों को सावधानीपूर्वक ट्रक में रखकर प्लांट से बाहर हटाया। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम की निगरानी में सिलेंडर हटाए गए हैं, ताकि दोबारा गैस रिसाव का खतरा न रहे। प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही है।

ग्रामीणों का दावा- अब भी दिख रहा गैस का असर

दूसरी ओर, ग्रामीणों ने प्लांट के आसपास गैस का असर पूरी तरह खत्म नहीं होने का दावा किया है। उनका कहना है कि गैस के प्रभाव से आसपास के पेड़-पौधों पर भी असर दिखाई दे रहा है। इसे लेकर ग्रामीणों में दहशत और नाराजगी है। हालांकि, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्लांट में लीकेज नहीं होने और स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही गई है। ऐसे में मौके की वास्तविक स्थिति और गैस के प्रभाव को लेकर प्रशासनिक दावों तथा ग्रामीणों के बयानों में अंतर सामने आया है।

तीन दिन में दूसरी बार रिसाव, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल

काहिरी बांध के पास स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में कुछ ही दिनों के अंतराल में दूसरी बार क्लोरीन गैस रिसाव की घटना सामने आने से प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी गैस रिसाव के बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी थी और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया था।

पहली घटना के दौरान एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। रिसाव नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली गई थी। इसके बावजूद दोबारा रिसाव की घटना सामने आने से प्लांट के रखरखाव, क्लोरीन सिलेंडरों की सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की मांग उठ रही है।

ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की

ग्रामीणों का आरोप है कि क्लोरीन जैसी गैस के इस्तेमाल वाले प्लांट में सुरक्षा मानकों और नियमित रखरखाव को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती जा रही है। उन्होंने प्लांट की तकनीकी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने तथा लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन की ओर से फिलहाल तीनों सिलेंडर प्लांट से हटाए जाने और स्थिति नियंत्रण में होने की जानकारी दी गई है। गैस रिसाव की वजह और प्लांट की तकनीकी खामी की विस्तृत जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे