उत्तम विचार वाले गुणीजनों की संगति करो- प्रत्यक्ष रत्नविजय महाराज

 


मंदसौर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। मनुष्य को उत्तम विचारों वाले, ज्ञानी व्यक्तियों का सानिध्य करना चाहिये। गृहस्थ जीवन में यदि व्यक्ति उत्तम विचारों का सानिध्य करता है तो उसका गृहस्थ जीवन सुखी रहता है। मनुष्य को जब भी ज्ञानी, उत्तम विचार वाले व्यक्ति का सानिध्य मिले उसे इसका लाभ लेते हुए ज्ञानवर्धक चर्चा करनी चाहिये। जीवन में सज्जन व्यक्तियों की संगति आपके जीवन का उद्धार कर सकती है।

उक्त उद्गार शनिवार को प.पू. जैन संत मुनिराज प्रत्यक्षरत्नविजयजी म.सा. ने मंदसौर के जीवागंज स्थित राजेन्द्र विलास में कहे। उन्होंने यहां धर्मसभा में धर्मबिन्दु ग्रंथ श्रवण कराते हुए कहा कि शास्त्रकार ने हमें अपने जीवन में उत्तम व्यक्तियों के साथ रहने की प्रेरणा दी है। शास्त्रकार कहते हैं कि उत्तम विचार वाले साधु, संत, ज्ञानी, पुरुष आपके जीवन को सद्मार्ग की ओर ले जा सकते हैं, लेकिन यदि आपने शराब पीने वाले या अन्य कोई व्यसन करने वाले व्यक्ति की संगति की है तो उसका साथ आपको अपयश ही देगा, जीवन में अनुचित कार्य करने, व्यसन करने वाले की संगति करने से बचो।

मुनिश्री ने कहा कि कोई व्यक्ति धनवान है, उत्तम कुल का है लेकिन उसमें संस्कार नहीं है तथा व्यसन में वह लिप्त है तो ऐसे व्यक्ति की भी हमें संगति नहीं करना चाहिये। आपने इस मौके पर सम्राट अशोक के पोत सम्प्रति महाराज का वृतान्त भी श्रवण कराया। सम्प्रति महाराज पूर्व भव में दरिद्र थे उन्हें जब संत का साथ मिला तो वे जैन मुनि बन गये और बाद में केवली के रूप में जीवन के कारण अगले भव में सम्राट अशोक के पोत के रूप में जन्मे और उन्होंने जाति स्मरण ज्ञान होने पर लाखों जैन मंदिर बनवाये। यह सब सम्प्रति महाराजा को उत्तम पुरुष अर्थात मुनि भगवंत के सानिध्य व संयम जीवन के कारण मिला। धर्मसभा में श्री पवित्ररत्न विजयजी ने भी विचार रखे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया