केवई नदी पर बैराज निर्माण के विरोध में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह, अडानी परियोजना के खिलाफ बढ़ा आंदोलन
अनूपपुर, 13 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा जनपद पंचायत क्षेत्र में अडानी कंपनी द्वारा स्थापित किए जा रहे 3200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट और केवई नदी पर प्रस्तावित अनिकट व नौ बैराजों के विरोध में बुधवार को ग्रामीणों और युवाओं ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। ग्राम चंगेरी में समाजसेवी अनुज गौतम और जिला पंचायत सदस्य रामजी रिंकू मिश्रा के नेतृत्व में चल रहे “केवई बचाओ आंदोलन” के तहत प्रदर्शनकारी नदी में उतरकर विरोध जताते रहे।
आंदोलनकारियों ने केवई नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बचाने की मांग करते हुए प्रशासन और कंपनी पर क्षेत्र को जल संकट की ओर धकेलने का आरोप लगाया। दोपहर में बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी के पानी में बैठकर जल सत्याग्रह करते रहे। मौके पर प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल भी तैनात रहा।
आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना है कि पूर्व में जिला प्रशासन को आवेदन देकर जल सत्याग्रह की चेतावनी दी गई थी, लेकिन प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
जिला पंचायत सदस्य रामजी रिंकू मिश्रा ने कहा कि विकास के नाम पर अडानी पावर प्रोजेक्ट के जरिए केवई नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि उद्योगपति और प्रशासन की मिलीभगत से नदी को बांधने की तैयारी की जा रही है, जिससे निचले क्षेत्रों में पानी पहुंचना कम हो गया है और कई गांवों में जल संकट की स्थिति बनने लगी है।
समाजसेवी अनुज गौतम ने कहा कि जल सत्याग्रह के माध्यम से अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक, प्रस्तावित बैराज निर्माण निरस्त करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कोतमा क्षेत्र के हजारों परिवार जल संकट और रोजगार संकट से प्रभावित होंगे। नदी पर निर्भर किसान, मछुआरे और अन्य वर्गों के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पावर प्लांट की जनसुनवाई के दौरान केवई नदी से पानी लेने अथवा बैराज निर्माण का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। उस समय दावा किया गया था कि परियोजना के लिए सोन नदी से पाइपलाइन के माध्यम से पानी लाया जाएगा, लेकिन वर्तमान स्थिति अलग दिखाई दे रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बुधवार शाम कोतमा विधायक एवं राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल के निवास पर आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने पहुंच रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केवई नदी के प्रवाह से छेड़छाड़ नहीं रोकी गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला