आधे मानसून के बाद भी सतना-मैहर में अच्छी बारिश का इंतजार, अगस्त से बंधी किसानों की उम्मीदें

 


सतना/मैहर, 31 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना और मैहर जिले में मानसून का आधा सफर पूरा होने के बावजूद अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी है। सामान्य से कम बारिश का असर खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। खरीफ फसलों की स्थिति को लेकर किसानों की चिंता बढ़ रही है और अब उनकी उम्मीदें अगस्त महीने की बारिश पर टिकी हैं।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के चार महीनों में से दो महीने बीत चुके हैं, जबकि सितंबर के दूसरे पखवाड़े से मानसून की वापसी शुरू हो जाती है। ऐसे में अगस्त का महीना ही बारिश की कमी पूरी करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस दौरान अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों के साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

बारिश के आंकड़े भी इस चिंता को मजबूत करते हैं। जून में सामान्यतः करीब 5.25 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार केवल लगभग 1.75 इंच बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम रही। जुलाई में भी रुक-रुककर हल्की बारिश और बूंदाबांदी होती रही, लेकिन तेज और लगातार वर्षा का दौर नहीं आया। सामान्य रूप से जुलाई में करीब 14.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक लगभग 12.5 इंच वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है।

लगातार हल्की बारिश से खेतों में नमी तो बनी हुई है, लेकिन जलाशयों के भराव और भूजल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। कई छोटे तालाब और ग्रामीण जलस्रोत अब भी पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं, जिससे आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान जिले में बादलों की आवाजाही जारी रही और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश तथा बूंदाबांदी हुई। हालांकि तेज बारिश नहीं होने से उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया। वातावरण में नमी अधिक रहने के कारण दिन और रात दोनों समय चिपचिपी गर्मी का अहसास बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार जिले का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह 86 प्रतिशत और शाम 78 प्रतिशत आर्द्रता रिकॉर्ड होने से उमस और बढ़ गई।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों की बेहतर बढ़वार के लिए आगामी दिनों में पर्याप्त वर्षा जरूरी है। यदि अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो फसलों को राहत मिलने के साथ जलाशयों का जलस्तर सुधरेगा और भूजल भंडार भी मजबूत होंगे। फिलहाल सतना और मैहर जिले में किसान से लेकर आम नागरिक तक सभी की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी