धीरेंद्र शास्त्री बोले- बेटियो! दुर्गा बनना, काली बनना, कभी बुर्केवाली मत बनना

 


सागर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा बुधधार काे मध्य प्रदेश के सागर जिले पहुंची। गढ़ाकोटा में आयोजित सभा में उन्होंने नवरात्र, गरबा पंडालों की सुरक्षा, लव जिहाद, सामाजिक समरसता और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। बेटियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, बेटियो! तुम दुर्गा बनना, काली बनना, लेकिन कभी ना बुर्केवाली बनना। उन्होंने गरबा पंडालों में बाहरी लोगों की पहचान सुनिश्चित करने की बात भी कही।

11 अक्टूबर से शुरू हुई यह यात्रा 13 अक्टूबर की रात सागर जिले के गढ़ाकोटा पहुंची। यहां बस स्टैंड पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। मंच से संबोधन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि नवरात्र के दौरान गरबा पंडालों में सतर्कता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा में प्रवेश करते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि गरबा पंडालों में प्रवेश देने से पहले लोगों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने गोमूत्र पिलाकर प्रवेश देने की बात भी कही।

शास्त्री ने ऐसे लोगों की तुलना कालनेमि से करते हुए कहा कि वे रूप बदलकर आते हैं। उन्होंने गढ़ाकोटा और पूरे सागर क्षेत्र को लव जिहाद से मुक्त बनाने का संकल्प भी दोहराया। उन्होंने कहा कि वे साधु हैं, नेता नहीं, और समाज को जागरूक करना उनका कर्तव्य है।

जात-पात छोड़कर एकजुट होने की अपील

रथयात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए लोगों से जातिगत भेदभाव समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा, जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट रहने और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहयोग करने का आह्वान किया।

उन्होंने युवाओं और ग्रामीणों से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए गांवों को नशामुक्त बनाने का संकल्प दिलाया। उनके संबोधन में सामाजिक एकता और नशामुक्ति का संदेश प्रमुखता से शामिल रहा।

गढ़ाकोटा में कार्यक्रम के बाद रथयात्रा रहली बायपास, कड़ता गांव और ढाना होते हुए आगे बढ़ी। मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा बम्होरी बीका, बम्होरी चौराहा और आरटीओ रोड से होते हुए देर रात करीब 2.30 बजे बालाजी मंदिर परिसर पहुंची। यहां दिव्य दरबार आयोजित किया गया और यात्रा का रात्रि विश्राम हुआ।

बोले- तनातनी नहीं, सनातनी रहें

पत्रकारों से चर्चा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि रथयात्रा का उद्देश्य कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक सनातन का संदेश पहुंचाना है। उन्होंने यात्रा का मूल संदेश बताते हुए कहा, तनातनी नहीं, सनातनी रहें... एक रहेंगे, नेक रहेंगे।

दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है और युवाओं को अपनी बात रखने तथा मांगें उठाने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि देश की छवि को नुकसान न पहुंचे।

चौथे दिन सागर से टीकमगढ़ की ओर बढ़ी यात्रा

14 अक्टूबर को रथयात्रा के चौथे दिन बालाजी मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और ध्वजारोहण के साथ यात्रा की शुरुआत हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा मोती नगर चौराहा, ओम स्टील, रेलवे ब्रिज और भगवानगंज होते हुए मकरोनिया पहुंची। रजाखेड़ी चौराहे पर यात्रा का स्वागत किया गया।

इसके बाद कर्रापुर में मंचीय कार्यक्रम और संकल्प का आयोजन किया गया। बंडा में दोपहर के भोजन के बाद यात्रा शाहगढ़ पहुंची, जहां मंडी परिसर में श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया जाना निर्धारित था। दिन के कार्यक्रम के बाद रात्रि विश्राम शासकीय पीजी कॉलेज, टीकमगढ़ में रखा गया।

15 अक्टूबर को छतरपुर में होगा समापन

रथयात्रा के अंतिम दिन 15 अक्टूबर को टीकमगढ़ के शासकीय पीजी कॉलेज से यात्रा आगे बढ़ेगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जतारा में दोपहर के भोजन और विश्राम के बाद पलेरा में संकल्प कार्यक्रम होगा। इसके बाद छतरपुर में भव्य महाहवन के साथ पांच दिवसीय सनातन हिंदू एकता रथयात्रा का समापन किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे