सनातन धर्म नफरत नहीं, भाईचारे और एकता का संदेश देता है : दिग्विजय सिंह

 


राजगढ़, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोमवार शाम राजगढ़ जिले के सारंगपुर में सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दौरान कहा कि सनातन धर्म भाईचारे, एकता, अखंडता और सभी धर्मों के सम्मान का संदेश देता है। धर्म के नाम पर नफरत फैलाने के बजाय समाज में आपसी सद्भाव और एकता को मजबूत किया जाना चाहिए। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने सनातन धर्म, राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

धार्मिक आस्था पर नहीं पड़ता राजनीतिक विरोध का असर

दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। राजनीतिक विरोधी उन्हें हिंदू विरोधी कहते हैं तो कहते रहें, इससे उनकी धार्मिक आस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को किसी एक राजनीतिक विचारधारा तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। सभी धर्मों और धार्मिक स्थलों का सम्मान करना ही इसकी मूल भावना है।

हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर रखी बात

पूर्व मुख्यमंत्री ने हिंदुत्व और सनातन धर्म के बीच अंतर बताते हुए आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर लोगों को भ्रमित किया गया और राहुल गांधी के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का उद्देश्य भी समाज से नफरत दूर करना और लोगों को जोड़ना था। उन्होंने लोगों से धर्म के नाम पर मतभेद बढ़ाने के बजाय सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

राम मंदिर से जुड़े आरोपों की जांच की मांग

राम मंदिर के मुद्दे पर दिग्विजय सिंह ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच कराने और जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर दिया जोर

दिग्विजय सिंह ने लोकतंत्र की मजबूती और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक