सड़क हादसे नियति नहीं, लापरवाही का नतीजा: जस्टिस अभय मनोहर सप्रे
सागर, 24 जुलाई (हि.स.)। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मध्य प्रदेश के सागर कलेक्ट्रेट सभागार में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने की।
बैठक में जस्टिस सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं किसी नियति या ईश्वर की इच्छा का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि अधिकांश मामलों में मानवीय भूल, तकनीकी खामियों और प्रबंधन संबंधी कमियों के कारण होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और सड़क अवसंरचना में समय रहते आवश्यक सुधार किए जाएं तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उनका लक्ष्य सड़क हादसों में मृत्यु के आंकड़े को शून्य के करीब लाना बताया गया।
उन्होंने जिले में दुर्घटना संभावित स्थलों (ब्लैक स्पॉट) पर किए गए सुधार कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इससे दुर्घटनाओं में कमी आई है। साथ ही शेष चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर भी शीघ्र सुधार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि सागर सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश और देश के लिए एक आदर्श जिला बन सके।
बैठक में कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
प्रशासन ने तय किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना अनुमति बनाए गए अवैध मीडियन कट के मामलों में संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक जानलेवा सड़क दुर्घटना का विस्तृत विश्लेषण करने के लिए डेथ रिव्यू कमेटी गठित की जाएगी। यह समिति दुर्घटना के कारण, स्थान, समय तथा हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा मानकों के पालन की समीक्षा करेगी।
दुर्घटना पीड़ितों को 'गोल्डन आवर' के भीतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एम्बुलेंस सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम कम करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध ब्रेथ एनालाइजर से नियमित जांच, ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग पर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिले की सभी सड़कों का सर्वे कर गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराने और निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं में डिजाइन संबंधी त्रुटियों को दूर करने के निर्देश भी संबंधित विभागों को दिए गए।
सड़क सुरक्षा को केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी से जोड़ने पर भी सहमति बनी। इसी क्रम में जिले के सभी शासकीय कर्मचारियों के लिए दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाएगा। बिना हेलमेट कार्यालय पहुंचने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
इसके अलावा अगले दो माह में जिले के पेट्रोल पंपों पर नो हेलमेट, नो फ्यूल व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना तैयार की जा रही है, ताकि हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा मिल सके।
बैठक में बताया गया कि सेवलाइफ फाउंडेशन द्वारा सागर जिले में 152 दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान की गई है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स के त्वरित सुधार के लिए लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सागर उन छह संवेदनशील जिलों में शामिल है, जहां सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।
बैठक के अंत में प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाने में सभी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। दोपहिया वाहन चलाते समय मानक गुणवत्ता वाला हेलमेट पहनें, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का उपयोग करें तथा यातायात नियमों का पूरी गंभीरता से पालन करें।
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे