मातृ एवं शिशु मृत्यु दर शून्य करने की दिशा में सागर में विशेष प्रशिक्षण, कलेक्टर ने दिए मैदानी अमले को निर्देश

 


सागर, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने और शून्य के लक्ष्य की दिशा में जिला प्रशासन ने मैदानी स्वास्थ्य अमले का विशेष उन्मुखीकरण शुरू किया है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के मार्गदर्शन में सभी विकासखंडों में एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के लिए प्रशिक्षण एवं समीक्षा सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को जैसीनगर विकासखंड में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, नियमित निगरानी और प्रभावी फॉलो-अप के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि मैदानी स्तर पर सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता समन्वित ढंग से कार्य करें तो सागर जिला भी इस दिशा में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को अनमोल-2.0 एप और यू-विन पोर्टल पर शत-प्रतिशत एवं त्रुटिरहित डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि सटीक आंकड़े ही प्रभावी स्वास्थ्य प्रबंधन का आधार हैं। यदि किसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल निराकरण कराया जाए।

प्रशिक्षण के दौरान पात्र दंपत्तियों के शत-प्रतिशत पंजीयन, समय पर प्रसव पूर्व जांच तथा जन्म के बाद शिशुओं को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया गया।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान और उनकी नियमित निगरानी में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। एएनएम द्वारा चिन्हित प्रत्येक हाई रिस्क गर्भवती की जानकारी संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पास उपलब्ध रहे तथा आवश्यकता पड़ने पर जिला अस्पताल अथवा बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज को समय रहते रेफर करने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने एसएनसीयू से डिस्चार्ज होने वाले नवजात शिशुओं का 56 दिन तक नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इस संबंध में एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को प्रसवोत्तर देखभाल और नवजात स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्व में सामने आए मामलों की केस स्टडी प्रस्तुत कर मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों को संभावित त्रुटियों से बचने और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के.वी., एसडीएम रोहित वर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे