दतिया : पत्थर खदानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप, गहरी खाइयों में बिना सुरक्षा उपकरण काम कर रहे मजदूर

 


दतिया, 04 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में संचालित पत्थर खदानों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई खदानों में निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए गहरे गड्ढों में मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के काम कराया जा रहा है। साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों के समीप होने वाली ब्लास्टिंग से भी लोगों में भय और असंतोष का माहौल है।

जिला मुख्यालय के सरसई रोड और चिरगांव रोड पर संचालित खदानों और क्रेशर इकाइयों के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां अक्सर ब्लास्टिंग की जाती है, जिससे तेज कंपन और धूल के गुबार के कारण आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि इस संबंध में खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर भांडेर क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पत्थर खदानें संचालित हैं। कई खदानों की गहराई 300 से 500 फीट तक पहुंच चुकी है। ऐसे स्थानों पर मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर होने वाले हादसों में श्रमिकों की जान भी जाती रही है।

श्रमिकों से जुड़े नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि कई खदान संचालक मजदूरों का नियमित रिकॉर्ड नहीं रखते, उन्हें नकद भुगतान किया जाता है तथा श्रम विभाग में पंजीयन, दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य बीमा जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जातीं। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने पर प्रभावित श्रमिकों को कानूनी और आर्थिक संरक्षण मिलने में कठिनाई आती है।

माइंस सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी अनियमितताओं की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि खदानों के संचालन से पहले संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक जानकारी देने की प्रक्रिया का भी कई मामलों में समुचित पालन नहीं किया जाता, जिससे सुरक्षा निगरानी प्रभावित होती है।

स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि खदानों में ब्लास्टिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं की जाती। पत्थरों में ड्रिलिंग और विस्फोट से जुड़े कार्यों में प्रशिक्षित कर्मियों के बजाय सामान्य मजदूरों से काम कराया जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जिले की सभी पत्थर खदानों का संयुक्त निरीक्षण कराने, सुरक्षा मानकों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

हिन्दुस्थान समाचार/संतोष तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा