साड़ा कॉलोनी भूखंड आवंटन में जांच ठप, प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल

 




चंदेरी, 26 मार्च (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के पर्यटन स्‍थल चंदेरी की साड़ा कॉलोनी में भूखंड आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं की जांच छह माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। प्रशासन द्वारा गठित जांच दल अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम शुभ्रता त्रिपाठी ने सितंबर 2025 में आठ सदस्यीय जांच दल का गठन किया था। टीम को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बावजूद जांच अधूरी बनी हुई है।

जांच दल में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, नगर पालिका अधिकारी सहित राजस्व अमला शामिल था, इसके बावजूद न तो राजस्व प्रशासन और न ही नगरपालिका प्रशासन किसी निष्कर्ष पर पहुंच सका है। बताया जा रहा है कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और फाइलों के गायब होने के कारण जांच प्रभावित हो रही है।

अनियमितताओं के आरोप और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

साड़ा कॉलोनी का गठन वर्ष 1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के तहत किया गया था। वर्ष 1992 में आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के भूखंडों का पंजीयन किया गया, लेकिन विधिवत आवंटन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

वर्ष 1995 में नगरपालिका के पुनर्गठन के बाद भूखंड आवंटन की जिम्मेदारी नगर पालिका के पास आ गई। आरोप है कि इसके बाद अभिलेखों में कथित कूट रचना कर नियम विरुद्ध तरीके से भूखंडों का आवंटन किया गया। यहां तक कि शासकीय भूमि को भी कॉलोनी के प्लॉट के रूप में दर्शाकर आवंटित करने के मामले सामने आए हैं।

जांच में सामने आ रही प्रमुख समस्याएं

मामले में सबसे बड़ी बाधा रिकॉर्ड का अभाव बताया जा रहा है। नगरपालिका के रिकॉर्ड शाखा से कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब बताई जा रही हैं, जिससे निष्पक्ष जांच संभव नहीं हो पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जिनके कार्यकाल में फाइलें गायब हुई हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जांच में पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों-कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को आवंटित भूखंडों, शासकीय भूमि के उपयोग, पंजीयन व नामांतरण प्रक्रिया, विक्रय पत्रों और अभिलेखों में की गई कथित छेड़छाड़ की जांच शामिल है।

एसडीएम मनीष धनकर ने बताया कि जांच टीम का गठन कर 10 दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। फाइलों के गायब होने की जानकारी मिली है, संबंधित जिम्मेदारों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रदीप शर्मा ने स्वीकार किया कि कॉलोनी से जुड़े अभिलेखों में गड़बड़ी और नाम परिवर्तन के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर ही निष्पक्ष जांच संभव है और फाइलें गायब होने के मामले में संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

मामले की जानकारी उच्च स्तर तक होने के बावजूद जांच का लंबित रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे शासन को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई संभव नहीं हो सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / Nirmal Kumar Vishwkarma