सभ्यता बदलती रहती है, संस्कृति कभी नहीं बदलती : दिनेश तेजरा
धार, 30 जून (हि.स.)। देश की हजारों वर्षों की गौरवमयी यात्रा का नाम हिंदुत्व है। यह यात्रा कभी वैदिक, कभी सनातनी और कभी इंडियन के नाम से आगे बढ़ती रही, लेकिन इसकी मूल आत्मा कभी नहीं बदली। हिंदुत्व के कारण ही देश की सांस्कृतिक पहचान आज भी कायम है। लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए देश की आत्मा और संस्कृति को सुरक्षित रखना जरूरी है।
यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धार विभाग के विभाग प्रचारक दिनेश तेजरा ने मंगलवार को मीसाबंदी भंवरलाल राजपुरोहित विचार मंच द्वारा आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम हिंदुत्व : एक विचार, एक संस्कृति, एक जीवन दृष्टिमें व्यक्त किए।
दिनेश तेजरा ने कहा कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कर्तव्य और धर्म की मूल भावना ही हिंदुत्व है। भारत की सभ्यता विश्व की प्राचीन और उन्नत सभ्यताओं में से एक रही है। उन्होंने कहा कि सभ्यता किसी राष्ट्र की भौतिक स्थिति को दर्शाती है, इसलिए उसमें समय के साथ बदलाव आते रहते हैं, लेकिन संस्कृति कभी परिवर्तित नहीं होती।
उन्होंने हिंदुत्व और धर्म की अवधारणा को समझाते हुए गुरु गोविंद सिंह, बाजीराव पेशवा, स्वामी विवेकानंद, तुलसीदास, कबीर और आदि शंकराचार्य के जीवन दर्शन का उदाहरण दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदू जागरण मंच के पूर्व प्रांत संयोजक राधेश्याम यादव ने की। उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय की ज्यादतियों ने ब्रिटिश शासन की याद दिला दी थी, लेकिन जेलों में बंद लाखों देशभक्त अपने संकल्प से नहीं डिगे। इसी संघर्ष का परिणाम है कि आज देश लोकतंत्र की खुली हवा में सांस ले रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मीसाबंदियों और दिवंगत मीसाबंदियों के परिवारों का अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर विचार मंच के संयोजक उदय वडनेरकर, सह संयोजक लीलाधर दांडक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi