अपडेट : मध्य भारत में तेजी से बढ़ रहा है संघकार्य, शताब्दी वर्ष में समाज की सज्जनशक्ति की सक्रिय भागीदारी सामने आई
भोपाल, 17 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य का विस्तार देशभर के साथ-साथ मध्य भारत प्रांत में भी तेजी से हो रहा है। हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार संघ की गतिविधियाँ शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैल रही हैं। शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय सहभागिता इस विस्तार का प्रमाण है।
प्रदेश की राजधानी भोपाल में विश्व संवाद केंद्र में आयोजित पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए मध्यभारत प्रांत के संघचालक अशोक पाण्डेय ने मंगलवार को बताया कि वर्तमान समय में प्रांत के 2481 स्थानों पर कुल 3842 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इनमें महानगरों के 37 स्थानों पर 544 शाखाएं तथा ग्रामीण जिलों के 2444 स्थानों पर 3298 शाखाएं सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त 689 स्थानों पर 736 साप्ताहिक मिलन के माध्यम से भी संघकार्य संचालित किया जा रहा है।
संघ के सेवा कार्यों का विस्तार भी उल्लेखनीय है। वर्तमान में शाखाओं के माध्यम से 271 सेवा उपक्रम चलाए जा रहे हैं। संघ द्वारा चिह्नित 1013 सेवा बस्तियों में से 367 में शाखाएं संचालित हैं, जबकि 970 बस्तियों में सेवा कार्य जारी हैं और 611 बस्तियों में स्वयंसेवकों का नियमित संपर्क बना हुआ है। यह आँकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि संघ का कार्य केवल संगठनात्मक विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी उसकी सक्रिय भूमिका है।
प्रशिक्षण के माध्यम से व्यक्तित्व विकास पर जोर
संघ अपने कार्यकर्ताओं के व्यक्तित्व विकास और संगठनात्मक समझ को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन करता है। इस वर्ष तीन दिवसीय 179 प्रारंभिक वर्ग आयोजित किए गए, जिनमें 8021 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इसके अलावा 7 दिवसीय 61 प्राथमिक वर्गों में 3485 स्वयंसेवकों की सहभागिता रही। उच्च स्तर के प्रशिक्षण के अंतर्गत 15 दिन के 2 संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) में 589 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जबकि संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) में 184 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से स्वयंसेवकों को समाज कार्य, नेतृत्व क्षमता और संगठन संचालन की गहन जानकारी दी जाती है।
समाज परिवर्तन के विविध प्रयास
संघ के स्वयंसेवक समाज परिवर्तन के कार्यों में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। वर्तमान में 78 बाल गोकुलम्, 9 अध्ययन केंद्र और 13 मासिक कुटुम्ब मिलन संचालित किए जा रहे हैं। ग्वालियर में नशामुक्ति और सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। लहार जिले के सीगपुरा मंडल में व्यसन मुक्ति अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम में ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 80 लोग नशा छोड़ चुके हैं और मदनपुरा ग्राम पूर्णतः शराब मुक्त हो गया है। इसी प्रकार शिवपुरी की केशव शाखा द्वारा एक वर्ष पूर्व शुरू किया गया प्लास्टिक मुक्त अभियान सकारात्मक परिणाम दे रहा है।
कई स्थानों पर शाखाओं की प्रेरणा से “बर्तन बैंक” की शुरुआत की गई है, जो पर्यावरण संरक्षण में सहायक साबित हो रहे हैं। सीहोर जिले के जावर खंड में माधव शाखा द्वारा गोवंश के लिए रात्रि विश्राम गृह का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही “एक घर-एक रोटी” अभियान के माध्यम से समाज को गौसेवा से जोड़ा जा रहा है।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों से बढ़ा उत्साह
संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई जा रही है। अखिल भारतीय स्तर पर छह तथा प्रांत स्तर पर दो प्रमुख कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। अब तक विजयादशमी उत्सव, व्यापक गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन और प्रमुखजन गोष्ठियों का आयोजन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। आगामी समय में सद्भाव बैठकों, शाखा विस्तार और युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो विजयादशमी 2026 तक जारी रहेंगे।
विजयादशमी उत्सव से बना वातावरण
शताब्दी वर्ष की शुरुआत विजयादशमी उत्सव और पथ संचलन से हुई, जिसने पूरे प्रांत में एक विशेष वातावरण निर्मित किया। मध्य भारत प्रांत में 2124 स्थानों पर विजयादशमी उत्सव आयोजित हुए, जिनमें 2 लाख 80 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया।
इसके अतिरिक्त 1818 स्थानों पर पथ संचलन निकाले गए, जिनमें 2 लाख 73 हजार से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। भोपाल में आयोजित विशेष पथ संचलन में चिकित्सक, अधिवक्ता, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी, प्राध्यापक और व्यवसायियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए।
हिन्दू सम्मेलनों में रिकॉर्ड सहभागिता
20 दिसंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच मध्य भारत प्रांत में 1814 मंडलों और 759 बस्तियों में 1569 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में 52 लाख 63 हजार से अधिक लोगों की भागीदारी दर्ज की गई, जो समाज के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। इन आयोजनों में प्रभात फेरी, कलश यात्रा, वाहन रैली, मैराथन, मानव श्रृंखला और संत प्रवास जैसे कार्यक्रमों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। गाय पूजा, तुलसी पूजा, भारत माता आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सामाजिक एकता को मजबूत किया। सहभोज के माध्यम से समरसता का संदेश भी दिया गया।
गृह संपर्क अभियान बना जनसंपर्क का सेतु
शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चलाए गए व्यापक गृह संपर्क अभियान के तहत लगभग 80 हजार स्वयंसेवकों ने 23 हजार से अधिक टोलियों के माध्यम से 27 लाख 46 हजार परिवारों से संपर्क किया। यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचने का एक बड़ा प्रयास साबित हुआ। इसके साथ ही 7922 प्रमुखजनों से संपर्क स्थापित किया गया। भोपाल में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के प्रवास के दौरान पद्मश्री सम्मानित व्यक्तियों के साथ तथा ग्वालियर में सह सरकार्यवाह रामदत्त के साथ वैज्ञानिकों की ‘चाय पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों ने बौद्धिक वर्ग को भी जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुखजन गोष्ठियों में व्यापक सहभागिता
संघ के विचारों को समाज के प्रभावशाली वर्ग तक पहुँचाने के लिए 193 प्रमुखजन गोष्ठियों का आयोजन किया गया, जिनमें 17 हजार 494 से अधिक लोगों ने भाग लिया। भोपाल में आयोजित कार्यक्रमों में प्रमुखजन गोष्ठी, युवा संवाद, सामाजिक सद्भाव बैठक और स्त्री शक्ति संवाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
देशभर में संघकार्य का विस्तार
अखिल भारतीय स्तर पर भी संघकार्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं, जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 हो गई हैं। एक वर्ष में 3943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या में 5820 की वृद्धि हुई है। संघ की पहुंच अब अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों तक भी हो चुकी है। देशभर में अब तक 37,048 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है, जिनमें लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगों ने भाग लिया है।
गृह संपर्क अभियान के तहत कुछ प्रांतों में ही 10 करोड़ घरों और 3 लाख 90 हजार गांवों तक संपर्क स्थापित किया जा चुका है। केरल जैसे राज्यों में भी मुस्लिम और ईसाई परिवारों के साथ संवाद स्थापित कर सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।
समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आह्वान
संघ के नेतृत्व ने समाज से आह्वान किया है कि महापुरुषों के कार्यों को जाति और पंथ से ऊपर उठकर स्वीकार किया जाए और उनके आदर्शों को अपनाते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसी दिशा में गुरु तेग बहादुर के बलिदान के 350वें वर्ष पर देशभर में 2000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। वंदेमातरम की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी समय में संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष पर भी व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी