संघ की नई संरचना लागू, प्रांत के स्थान पर प्रदेश स्तरीय संगठन व्यवस्था शुरू

 


मप्र में संभाग सात, विस्तार और समन्वय के दायित्व अलग

भोपाल, 17 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के बीच संगठनात्मक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए प्रांतों का पुनर्गठन किया है। अब राज्य को एक ही प्रदेश के रूप में संगठित किया जाएगा, जबकि पहले मध्य भारत, मालवा और महाकौशल तीन अलग-अलग प्रांत मध्य प्रदेश में थे। इसके साथ ही विभागों के ऊपर ‘संभाग’ की नई इकाई जोड़ी गई है, जिससे संगठनात्मक कार्य में अधिक समन्वय और विस्तार की गति तेज होने की अपेक्षा है। उक्त बातें मंगलवार को पत्रकारों के बातचीत करते हुए मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने कहीं।

वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक जो हरियाणा के पानीपत के निकट समालखा में 13-15 मार्च को संपन्न हुई के विषय में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष के कार्यविस्तार की दृष्टि से व्यापक निर्णय लिया गया है, अब संभागों में भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा की कार्यसमितियां स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगी, उन्होंने स्पष्ट किया कि नई संरचना के तहत विभागीय, जिला एवं तहसील व्यवस्था यथावत रहेगी, लेकिन उसके ऊपर संभाग स्तर जोड़ा गया है। इससे कार्य का बेहतर विभाजन और प्रभावी संचालन संभव होगा। राज्य स्तर पर प्रदेश कार्यसमिति गठित होगी, जिसमें प्रदेश प्रचारक एवं प्रदेश कार्यवाह नेतृत्व कर सभी के बीच समन्वय का कार्य करेंगे।

पत्रकार वार्ता में प्रांत प्रचार प्रमुख अखिलेश श्रीवास्तव और सह प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. लोकेन्द्र राजपूत भी उपस्थित रहे। अशोक पांडे ने बताया कि आगामी वर्ष को संत रविदास जन्म जयंती वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत समाज में समरसता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने समालखा मे हुई अभा प्रतिनिधि सभा बैठक को लेकर बताया कि देशभर से 1438 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ आगामी योजनाओं पर चर्चा की गई। जिसमें कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ ने सात प्रमुख कार्यक्रम तय किए थे, जिनका उद्देश्य समाज जीवन में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करना है। इनमें विजयादशमी उत्सव, व्यापक गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन, प्रमुखजन गोष्ठियां, युवा संवाद और सद्भावना बैठकों जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन आयोजनों को समाज का व्यापक समर्थन मिला है।

उन्होंने जानकारी दी कि मध्य भारत प्रांत में संघकार्य तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इनमें महानगरों में 544 शाखाएं और ग्रामीण जिला क्षेत्र में 2444 स्थानों के विविध क्षेत्रों में 3298 शाखाएं शामिल हैं। इसके अलावा 689 स्थानों पर साप्ताहिक मिलन भी हो रहे हैं। संघ द्वारा 271 सेवा उपक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 970 बस्तियों में सेवा कार्य चल रहे हैं।

संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए पांडे ने बताया कि विजयादशमी उत्सव में 2124 स्थानों पर आयोजन हुए, जिनमें 2.80 लाख से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया। वहीं, 1818 स्थानों पर पथ संचलन आयोजित किए गए, जिनमें 2.73 लाख स्वयंसेवक शामिल हुए।

हिन्दू सम्मेलनों के माध्यम से भी समाज में व्यापक जागरण देखने को मिला। मध्य भारत प्रांत में 1569 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिनमें 52 लाख से अधिक लोगों ने भागीदारी की। इन आयोजनों में प्रभात फेरी, कलश यात्रा, मानव श्रृंखला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया गया। वहीं, गृह संपर्क अभियान के तहत लगभग 80 हजार स्वयंसेवकों ने 27 लाख से अधिक परिवारों तक पहुंच बनाकर संघ के विचारों को साझा किया। इसके अलावा 7922 प्रमुखजनों से संपर्क स्थापित कर बौद्धिक वर्ग को भी जोड़ने का प्रयास किया गया।

संघ कार्य के विस्तार के साथ सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों का भी उल्लेख करते हुए पांडे ने बताया कि स्वयंसेवक नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर सक्रिय हैं। ग्वालियर में नशामुक्ति अभियान के तहत कई लोगों ने व्यसन छोड़ा है, वहीं शिवपुरी में प्लास्टिक मुक्त अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि संघ शिक्षा वर्गों के माध्यम से कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। तीन दिवसीय, सात दिवसीय और 15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में हजारों स्वयंसेवकों ने भाग लिया है।

अखिल भारतीय स्तर पर संघ के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देशभर में शाखाओं की संख्या बढ़कर 88,949 हो गई है, जो पिछले वर्ष 83,129 थी। यह वृद्धि संघ के प्रति समाज के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। पत्रकार वार्ता के अंत में पांडे ने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज की सज्जनशक्ति को संगठित कर भारत को परम वैभव की ओर ले जाना है। नई संरचना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो संगठन को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी