मध्य भाारत में अधिकतम स्थानों पर शाखा लगाएंगे स्वयंसेवक, मध्य भारत प्रान्त की दो दिवसीय बैठक का आयोजन
- भोपाल में संघकार्य एवं शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, आगामी योजना पर चिंतन-मंथन
भोपाल, 14 जून (हि.स.)। मध्य भारत प्रान्त में संघ का कार्य अपेक्षा के अनुरूप बढ़ रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ कार्य की वृद्धि को और गति मिली है। वर्तमान में कुल 1730 मंडल संघकार्य युक्त हैं । वहीं, मध्यभारत प्रान्त में एक वर्ष में शाखाओं की संख्या भी बढ़ी है। पिछले वर्ष प्रान्त में कुल 3674 शाखाएं लग रही थीं, जो बढ़कर 3957 हो गयी हैं। आगामी वर्ष तक 5000 से अधिक शाखाओं का लक्ष्य है। भोपाल स्थित शारदा विहार में 13-14 जून को आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्य भारत प्रान्त की प्रान्त बैठक में यह जानकारी प्रान्त कार्यवाह हेमंत सेठिया ने दी।
उल्लेखनीय है कि उक्त बैठक में प्रान्त में संघ कार्य की स्थिति और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी। प्रान्त बैठक में प्रान्त कार्यकारिणी, विभाग कार्यकारिणी और जिला टोली शामिल रहती है। इस प्रकार लगभग 514 दायित्ववान कार्यकर्ता बैठक में शामिल रहे। इस अवसर पर प्रान्त संघचालक अशोक पांडेय एवं सह-प्रान्त संघचालक डॉ. राजेश सेठी भी उपस्थित रहे। बैठक के प्रारंभ में दिवंगत कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
प्रान्त कार्यवाह हेमंत सेठिया ने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विजयादशमी उत्सव, प्रमुखजन गोष्ठी, व्यापक गृह संपर्क अभियान और सद्भाव बैठकों का आयोजन हो चुका है। अब युवाओं के कार्यक्रम और अधिकतम स्थानों पर अधिकतम शाखा लगाने की तैयारी है। बैठक में इन दोनों कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के निमित्त व्यापक गृह संपर्क अभियान में संघ के लगभग 80 हजार स्वयंसेवक, 27 लाख 46 हजार 780 घरों तक पहुंचे। इसके साथ ही प्रान्त के 15890 ग्रामों में भी संघ का विचार लेकर स्वयंसेवक पहुंचे। इसी प्रकार, मंडल-बस्ती स्तर पर हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। ये आयोजन समाज की सज्जनशक्ति के सहयोग से किये गए। समाज की सज्जनशक्ति ही हिन्दू सम्मेलनों में नेतृत्व की भूमिका में रही। प्रान्त में 1569 मंडल और सभी 759 बस्तियों में हुए हिन्दू सम्मेलनों में लगभग 52 लाख 62 हजार 289 नागरिक शामिल हुए, जिनमें मातृशक्ति की संख्या 27 लाख 30 हजार 656 रही।
नगर एवं खंड स्तर पर हुई सामाजिक सद्भाव बैठकों में भी अपेक्षित परिणाम मिला है। प्रान्त की 200 इकाई में से 178 इकाई पर ये बैठकें सम्पन्न हुईं, जिनमें 9775 लोग शामिल हुए। इसमें महिलाओं की संख्या 702 रही। वहीं, 193 स्थानों पर प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिनमें 17494 लोग शामिल हुए। इनमें 2084 महिलाएं शामिल रहीं।
प्रान्त कार्यवाह ने इस दौरान यह भी बताया कि पिछले वर्ष तक कुल 2448 सेवा कार्य प्रांत में चल रहे थे, इस वर्ष यह संख्या 3100 हो गई। वहीं, 385 सेवा कार्य शाखाओं द्वारा चल रहे हैं। प्रांत में कुल 1013 सेवा बस्ती हैं, जिसमें 970 सेवा कार्ययुक्त हो गई हैं।
संघ शिक्षा वर्गों में संघ कार्य का प्रशिक्षण :उल्लेखनीय है कि संघकार्य की समझ बढ़ाने एवं कार्यकताओं के व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से संघ प्रतिवर्ष संघशिक्षा वर्गों को आयोजन करता है। इस वर्ष तीन दिवस के 171 प्रारंभिक वर्ग आयोजित किए गए, जिनमें 7641 स्वयंसेवक शामिल हुए। सात दिवस की अवधि के 38 प्राथमिक वर्गों में 1974 स्वयंसेवक शामिल हुए। इसी तरह, तीन विभिन्न संघ शिक्षा वर्गों में कुल 690 स्वयंसेवकों ने संघकार्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रान्त में घोष वर्ग भी लगाया गया, जिसमें 98 स्वयंसेवकों ने घोष का प्रशिक्षण प्राप्त किया। क्षेत्र स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यकर्ता विकास वर्ग-1 में प्रान्त के 103 कार्यकर्ताओं ने और नागपुर में आयोजित होने वाले अखिल भारतीय स्तर के कार्यकर्ता विकास वर्ग-2 में प्रान्त के 33 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन सत्र में सह-सरकार्यवाह का प्रबोधन :मध्यभारत प्रान्त की बैठक में सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार का पाथेय भी कार्यकर्ताओं को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष के बाद अब हमें नगर-खंड की इकाई को सक्षम बनाना है एवं मंडल-बस्ती की इकाई को और मजबूत करना है। संगठन श्रेणी और जागरण श्रेणी के कार्य को अधिक स्पष्टता के साथ समाज व्यापी बनाना है। सज्जन शक्ति के साथ संपर्क-संवाद बढ़ाकर समाज परिवर्तन की दिशा में वातावरण बनाना चाहिए। 'पंच परिवर्तन' के आह्वान का क्रियान्वयन में समाज की सज्जनशक्ति को सहयोगी बनाना चाहिए। सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक अनुशासन, ये सबके करने के कार्य हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी