आरजीपीवी को तीन विश्वविद्यालयों में बांटने के प्रस्ताव पर विरोध तेज, शिक्षक-अधिकारी-कर्मचारी काली पट्टी बांधकर उतरे मैदान में
भोपाल, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन जोनल विश्वविद्यालयों में विभाजित करने के मध्य प्रदेश शासन के प्रस्ताव के विरोध में शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी एकजुट हो गए हैं।
मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया और शासन के प्रस्ताव के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि 28 वर्षों में विकसित प्रदेश के प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय का विभाजन स्वीकार नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय का मौजूदा स्वरूप बरकरार रखते हुए उसे और मजबूत करने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने 'विभाजन स्वीकार नहीं', 'आरजीपीवी का विभाजन स्वीकार नहीं' और 'विश्वविद्यालय एक का-एक रहेगा' जैसे नारे लगाए। संगठनों ने विश्वविद्यालय की पहचान और संचित कोष को सुरक्षित रखने की भी मांग की।
नया विश्वविद्यालय बनाना है तो अलग से बनाएं
आरजीपीवी अस्थायी कर्मी एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अमर अहिरे ने कहा कि शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर इसलिए विरोध कर रहे हैं, क्योंकि शासन ने आरजीपीवीको विभाजित कर तीन नई यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव में जबलपुर और उज्जैन में नए विश्वविद्यालय बनाए जाने की बात है। अहिरे ने कहा कि यदि शासन को नए तकनीकी विश्वविद्यालय बनाने हैं तो इसका विरोध नहीं है, लेकिन इसके लिए RGPV का विभाजन नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को कमजोर करने के बजाय उसकी मौजूदा व्यवस्था और संसाधनों को मजबूत किया जाना चाहिए।
नोडल सेंटर को हाईटेक करने का सुझाव
संघ के अध्यक्ष अमरअहिरे ने सुझाव दिया कि जबलपुर में पहले से मौजूद नोडल सेंटर को हाईटेक कर विकसित किया जा सकता है। इसी तरह उज्जैन के नोडल सेंटर को भी मजबूत किया जाए, ताकि दोनों संभागों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर तकनीकी सुविधाएं मिल सकें।उन्होंने कहा कि इससे शासन के संसाधनों का उपयोग भी होगा और RGPV का मौजूदा स्वरूप बनाए रखते हुए विद्यार्थियों को क्षेत्रीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से विश्वविद्यालय के विभाजन का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
16 अक्टूबर तक चरणबद्ध आंदोलन
शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी संगठनों ने 16 अक्टूबर तक चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन के तहत 6 से 9 अक्टूबर तक दोपहर 12 से 1:30 बजे तक सामूहिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 12 से 16 अक्टूबर तक सुबह 11:30 से दोपहर 1:30 बजे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। संगठनों का कहना है कि 21 सितंबर को भी शासन के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन कर काली पट्टी बांधी गई थी। इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
कार्यपरिषद की बैठक बुलाने की मांग
संगठनों ने आरजीपीवी की कार्यपरिषद की बैठक बुलाने की मांग की है। इसमें शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों की ओर से दिए गए ज्ञापनों पर चर्चा कर विश्वविद्यालय के विभाजन के प्रस्ताव के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की मांग की गई है। साथ ही विश्वविद्यालय के संचित कोष को पूरी तरह सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई है। प्रदर्शन में आरजीपीवी शिक्षक-अधिकारी संघ के सचिव डॉ. महेश पवार, तकनीकी शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रो. उदय चौरसिया और आरजीपीवी स्थायी कर्मी/दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अमर अहिरे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे