रीवा-मऊगंज में जल जीवन मिशन की हकीकत पर सवाल, 10 से अधिक पानी टंकियां बनीं शोपीस
रीवा, 30 मई (हि.स.)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत मध्य प्रदेश के रीवा और मऊगंज जिलों में बनाए गए कई जलापूर्ति प्रोजेक्ट ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच अनेक गांवों में पानी की टंकियां तो खड़ी हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं पहुंच रहा है। वहीं कई स्थानों पर पाइपलाइन अधूरी पड़ी है और घरों तक जलापूर्ति का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ऐसे हैं कि योजना के तहत लगाए गए नल और कनेक्शन केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कई गांवों में मुख्य पाइपलाइन को टंकियों से नहीं जोड़ा जा सका है, जबकि सप्लाई पाइप सड़क किनारे और खेतों की मेड़ों पर बिखरे पड़े हैं। इसके बावजूद संबंधित क्षेत्रों में घर-घर जलापूर्ति के दावे किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने घरों में नल कनेक्शन तो लगवा लिए हैं, लेकिन आज तक उनमें पानी नहीं आया। कई परिवार इस उम्मीद में कनेक्शन सुरक्षित रखे हुए हैं कि कभी न कभी योजना का लाभ उन्हें मिलेगा। दूसरी ओर गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराने से लोगों को रोजाना दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार मऊगंज जिले के तीनों विकासखंडों के अलावा रीवा जिले के गंगेव, सिरमौर, त्योंथर, जवा और रायपुर कर्चुलियान क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। विभागीय अभिलेखों में जहां अधिकांश परियोजनाओं को पूर्ण बताया जा रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर अनेक गांवों में जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
मऊगंज विकासखंड की डगडौआ, बेलहाई और रामपुर-चितईपुरवा ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियां तैयार हैं, लेकिन उनमें जलापूर्ति नहीं हो रही। इसी प्रकार नईगढ़ी विकासखंड के खर्रा, पैकनगांव और कसियार गांव तथा हनुमना क्षेत्र के हाटा-लोढ़ी और बलभद्रगढ़ सहित कई गांवों में भी लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के कार्यों में लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें अब तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका है। ऐसे में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी