दस साल से इंतजार, फिर भी खेतों तक नहीं पहुंचा बहुती नहर का पानी

 


रीवा, 1 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के किसानों के खेतों तक बाणसागर का पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई बहुती नहर परियोजना करीब एक दशक बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। परियोजना को वर्ष 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है। अब जल संसाधन विभाग ने जुलाई 2027 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में किसानों को खेतों तक नहर का पानी पहुंचने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

बहुती नहर परियोजना को विंध्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य बाणसागर बांध के पानी को रीवा, सतना और मैहर जिलों के किसानों के खेतों तक पहुंचाना है। परियोजना पूरी होने के बाद करीब 65 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने तथा 650 से अधिक गांवों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

परियोजना की मुख्य नहर की लंबाई करीब 74 किलोमीटर बताई गई है। इसके तहत सहायक नहरों के साथ सुरंग का निर्माण भी शामिल है। सुरंग सीधी जिले के करियाझर गांव के प्रवेश द्वार के समीप स्थित है। रीवा जिले में नहर रायपुर कर्चुलियान, गुढ़, मनगवां, नईगढ़ी और मऊगंज तहसीलों से होकर गुजरती है। इसी परियोजना के माध्यम से नईगढ़ी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की योजना है, जिससे करीब 50 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। नहर का निकास गोविंदगढ़ के बांसी गांव में बताया गया है।

किसानों ने जमीन दी, अब पानी का इंतजार

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं किसान नेता राजकुमार तिवारी के अनुसार परियोजना की लागत करीब 352 करोड़ रुपये है और अब तक लगभग 56 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। उनके मुताबिक मुख्य नहर का अधिकांश निर्माण हो चुका है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्रस्तावित करीब 14 किलोमीटर लंबे आरसीसी चैनल का लगभग आठ किलोमीटर हिस्सा अभी बनाया जाना बाकी है। इसके अलावा करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में कंक्रीट लाइनिंग और छोटी नहर का निर्माण कार्य भी अधूरा है।

तिवारी का कहना है कि किसानों ने अपनी जमीन शासन को निर्धारित दरों पर इस उम्मीद में उपलब्ध कराई थी कि बची हुई भूमि में सिंचाई सुविधा मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। किसानों को उम्मीद थी कि बहुती नहर के जरिए बाणसागर का पानी जल्द खेतों तक पहुंचेगा, लेकिन निर्माण में देरी के चलते उन्हें अब तक अपेक्षित सिंचाई सुविधा नहीं मिल सकी है।

निर्माण में देरी और क्षति के आरोप

किसान नेता ने नहर निर्माण में देरी के साथ कुछ स्थानों पर अधूरे और क्षतिग्रस्त कार्यों का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बारिश के दौरान कुछ जगह निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त होने और आवागमन प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे किसानों की परेशानियां और बढ़ी हैं।

उनका आरोप है कि किसानों ने परियोजना के लिए अपनी कीमती जमीन उपलब्ध कराई, लेकिन नहर का काम समय पर पूरा नहीं होने से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि परियोजना में देरी के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और सिंचाई सुविधा के अभाव में कृषि गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

गुणवत्ता जांच और बढ़े मुआवजे की मांग

राजकुमार तिवारी ने बहुती नहर परियोजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अधिग्रहित भूमि से प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित एवं बढ़ा हुआ मुआवजा दिलाने तथा निर्माण कार्य को निर्धारित समय से पहले पूरा कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

उनका कहना है कि बहुती नहर परियोजना पूरी होने और बाणसागर का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचने से विंध्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी