रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विकसित हुआ स्मार्ट इनवेंट्री सिस्टम, कैथ लैब में उपकरणों की कमी से पहले देगा अलर्ट

 


रीवा, 14 जुलाई (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के रीवा के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का कार्डियोलॉजी विभाग अब केवल हृदय रोग उपचार और जटिल प्रक्रियाओं के लिए ही नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। विभागाध्यक्ष एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वी.डी. त्रिपाठी ने कैथ लैब के उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक विशेष कैथ लैब इनवेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है।

यह सॉफ्टवेयर कैथ लैब में उपयोग होने वाले स्टेंट, बैलून, गाइडवायर, कैथेटर सहित अन्य आवश्यक उपकरणों और सामग्रियों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखेगा। साथ ही स्टॉक की लगातार निगरानी करेगा और किसी भी सामग्री का स्तर न्यूनतम सीमा तक पहुंचने से पहले संबंधित अधिकारियों को स्वतः अलर्ट भेजेगा। इससे समय रहते नई सामग्री की मांग तैयार की जा सकेगी और आवश्यक उपकरणों की कमी या अनावश्यक अपव्यय जैसी समस्याओं से बचा जा सकेगा।

मंगलवार को डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सॉफ्टवेयर का परीक्षण शुरू कर दिया गया है और कार्डियोलॉजिस्ट तथा कैथ लैब टेक्नोलॉजिस्ट से सुझाव भी लिए जा रहे हैं, ताकि इसे और अधिक उपयोगी एवं प्रभावी बनाया जा सके।

चिकित्सा के साथ तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विशेष रुचि रखने वाले डॉ. त्रिपाठी इससे पहले ‘भारतप्लेट डॉट एआई’ की अवधारणा भी विकसित कर चुके हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म भारतीय स्थानीय खानपान के आधार पर लोगों को वैज्ञानिक, संतुलित और हृदय-स्वस्थ आहार संबंधी मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इसके अलावा डॉ. त्रिपाठी हृदय रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक पुस्तक भी लिख चुके हैं, जिसमें दिल की बीमारियों की समय पर पहचान और बचाव के उपायों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. त्रिपाठी का कहना है कि उनका लक्ष्य चिकित्सा, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समन्वय से ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जो अस्पतालों, चिकित्सकों और मरीजों सभी के लिए लाभदायक हों।

वे केवल उपचार तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी लगातार प्रेरित करते हैं। हाल ही में उन्होंने स्वयं 100 किलोमीटर पैदल चलने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि जब वे मरीजों को नियमित पैदल चलने की सलाह देते हैं, तो स्वयं भी उसका पालन करना आवश्यक है। उनका मानना है कि हृदय रोगों का सबसे प्रभावी इलाज केवल दवाइयों में नहीं, बल्कि समय रहते बीमारी की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में भी है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी