2040 और 2055 की जरूरतों को ध्यान में रख रीवा की पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत : राजेन्द्र शुक्ल
रीवा, 02 अक्टूबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि शहरों के विस्तार के साथ उनकी बुनियादी सुविधाओं को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। इसी दृष्टि से रीवा की पेयजल व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान आवश्यकता के साथ वर्ष 2040 और 2055 में संभावित मांग को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में रीवा की पेयजल योजना 2.30 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। अब इसे 5.37 लाख आबादी की आवश्यकता के अनुरूप विस्तार दिया जा रहा है।
20 वर्षों में 298.06 करोड़ रुपये खर्च
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 20 वर्षों के दौरान विभिन्न शासकीय योजनाओं के माध्यम से रीवा की पेयजल व्यवस्था के विस्तार पर करीब 298.06 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें नगरीय आधारभूत सेवा एवं विकास योजना के 14.27 करोड़, मुख्यमंत्री पेयजल योजना के 54.83 करोड़, अमृत-1.0 के 36.43 करोड़ और अमृत-2.0 के 192.53 करोड़ रुपये शामिल हैं।
जलग्रहण क्षमता 27.50 से बढ़कर 125 एमएलडी
राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि वर्ष 2006 में रीवा की पेयजल योजना में जलग्रहण केंद्र की क्षमता 27.50 एमएलडी थी। इसमें बीहर नदी से 14 एमएलडी और बिछिया नदी से 13.50 एमएलडी पानी लिया जाता था।
अब अमृत-2.0 योजना के तहत बीहर नदी पर 125 एमएलडी क्षमता का नया जलग्रहण केंद्र तैयार किया गया है। वर्ष 2040 की जरूरत को ध्यान में रखकर इसमें पंप लगाए गए हैं और नए केंद्र का परीक्षण भी पूरा हो चुका है। वर्ष 2055 तक इसकी क्षमता 145 एमएलडी तक रखने की योजना है।
37 एमएलडी का नया जलशोधन संयंत्र तैयार
उप मुख्यमंत्री के अनुसार 800 मिलीमीटर व्यास वाली कच्चे पानी की पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही 37 एमएलडी क्षमता का नया जलशोधन संयंत्र भी तैयार कर लिया गया है और उसका सफल परीक्षण हो चुका है।
अमृत-2.0 के तहत प्रस्तावित 12 पानी की टंकियों में से सात का निर्माण पूरा हो गया है और उनका परीक्षण भी किया जा चुका है। इन टंकियों तक पानी पहुंचाने वाली करीब 35 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन भी तैयार है। इसके अलावा लगभग 200 किलोमीटर वितरण पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर से योजना का आंशिक लाभ शहरवासियों को मिलना शुरू हो जाएगा। अक्टूबर के अंत तक करीब 12 से 16 वार्डों में पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा सुधार दिखाई देने की उम्मीद है। पूरी अमृत-2.0 योजना मार्च 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
जलापूर्ति क्षमता 58 से बढ़कर 95 एमएलडी होगी
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में रीवा शहर में प्रतिदिन करीब 58 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जा रही है। अमृत-2.0 योजना पूरी होने के बाद इसमें 37 एमएलडी की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी। इससे कुल जलापूर्ति क्षमता 95 एमएलडी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे आगामी गर्मी में पूरे शहर को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
बिछिया के स्थान पर बीहर से जलापूर्ति
राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि लंबे समय तक रीवा शहर में बिछिया नदी से पेयजल लिया जाता रहा। रानी तालाब स्थित जलशोधन संयंत्र की मूल क्षमता 13 एमएलडी थी, लेकिन पुराना होने के कारण इसकी क्षमता घटकर करीब आठ एमएलडी रह गई थी।
वर्ष 2016-17 में रानी तालाब जलशोधन संयंत्र का जीर्णोद्धार और नवीनीकरण कराया गया था। इसके बाद तत्कालीन पेयजल व्यवस्था में सुधार हुआ। दीर्घकालिक समाधान के लिए बाणसागर बांध से मिलने वाले पानी को नहर के माध्यम से बीहर नदी में लाया गया। अब अमृत-2.0 के तहत बिछिया नदी पर आधारित 13 एमएलडी क्षमता वाले जलग्रहण केंद्र को समाप्त कर बीहर नदी पर बनाए गए नए 125 एमएलडी जलग्रहण केंद्र से रानी तालाब की योजना को भी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2006 में रीवा शहर में वितरण पाइपलाइन की लंबाई महज 120 किलोमीटर थी। अब इसे बढ़ाकर 945 किलोमीटर करने की योजना है। इसी तरह घरेलू नल कनेक्शनों की संख्या 12 हजार से बढ़ाकर 71 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है।
30 वर्ष पुरानी पाइपलाइन बदली जाएगी
उन्होंने कहा कि शहर में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के बाद अगली बड़ी चुनौती दूषित अथवा गंदे पानी की समस्या का समाधान करना है। इसके लिए 30 वर्ष से अधिक पुरानी और खराब हो चुकी पाइपलाइनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। उप मुख्यमंत्री के अनुसार पुरानी पाइपलाइनों को बदलने से पेयजल की गुणवत्ता में सुधार होगा और दूषित पानी की समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी