विन्ध्य में नशा कारोबारियों का हर षड्यंत्र होगा नेस्तनाबूद उपमुख्यमंत्री
रीवा, 13 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा सहित पूरे विंध्य क्षेत्र को नशामुक्त बनाने के लिए अब नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी। नशे के सौदागरों से लेकर अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादकों और सप्लायरों तक पहुंचकर कार्रवाई करने के निर्देश मंगलवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए इस बुराई को जड़ से खत्म करना होगा। इसके साथ ही नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को केवल अपराधी मानकर छोड़ने के बजाय उनके उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उप मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस के नवीन भवन स्थित सभागार में मंगलवार एक अचानक बैठक बुलाई जिसमें आईजी डीआईजी पुलिस अधीक्षक सीसी सहित कलेक्टर व अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा की। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा लिया गया।
उन्होंने कहा कि रीवा और विंध्य क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है। कृषि, उद्योग, व्यापार और अधोसंरचना के क्षेत्र में हो रहे विकास का सबसे अधिक लाभ युवाओं को मिलना है। ऐसे में यदि युवा पीढ़ी कोरेक्स, गांजा और दूसरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गई तो विकास के इन प्रयासों का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
बैठक में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने बताया कि पिछले 18 महीनों में संभाग में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई है। इस दौरान 1615 आरोपियों को जेल भेजा गया है। पुलिस ने नशीले पदार्थों के साथ अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों को भी जब्त किया है। वहीं, अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की गई है।
इस दौरान उप मुख्यमंत्री देश के गृह मंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में सभी को मिलकर गंभीरता से काम करना होगा। युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता और रोकथाम के प्रयास भी समान रूप से आवश्यक हैं। नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक में नगर निगम अध्यक्ष वेंकटेश पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भावना मरावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजीव पाठक, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय अनिल दुबे सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
18 महीने में 13.17 करोड़ के नशीले पदार्थ जब्त
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, रीवा संभाग में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इनमें 5535 किलो 931 ग्राम गांजा, कोरेक्स की 97,665 शीशियां, 4,13,310 नशीली टैबलेट और कैप्सूल तथा अफीम के 450 हरे पौधे शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने 123.6 ग्राम हेरोइन, 206.54 ग्राम स्मैक, 244 ग्राम ब्राउन शुगर और 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स भी जब्त की है। जब्त नशीले पदार्थों की कुल कीमत 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपये बताई गई है। नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जा रहे 181 दोपहिया और 131 चारपहिया वाहन भी जब्त किए गए हैं। इन वाहनों की कुल कीमत 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।
अवैध शराब के कारोबार में 12 हजार से अधिक गिरफ्तार
नशीले पदार्थों के अलावा संभाग में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की है। आईजी गौरव राजपूत के मुताबिक, अवैध शराब के मामलों में 11,998 प्रकरण दर्ज किए गए और 12,199 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 35,890 लीटर अवैध देशी शराब और 22,807 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। जब्त शराब की कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपये बताई गई है। पुलिस और प्रशासन का जोर केवल छोटे कारोबारियों तक सीमित रहने के बजाय नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क तक पहुंचने पर है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध नशीले पदार्थ जहां तैयार किए जाते हैं, वहां तक पहुंचकर कार्रवाई की जाए। इसके लिए दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
अब यूपी के सप्लायरों पर भी होगी कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर समन्वय जरूरी है। उत्तर प्रदेश से भी समन्वय बनाकर नशे के सप्लायरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वालों और उनके नेटवर्क का पता लगाकर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसमें प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्ययोजना तैयार करें और नियमित रूप से उसकी समीक्षा करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी