अगस्त आधा बीता, फिर भी बाणसागर डैम खाली, रबी फसल और बिजली उत्पादन पर संकट

 


रीवा, 14 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में जहां बारिश का दौर जारी है, वहीं रीवा संभाग में कम बारिश का असर बाणसागर डैम पर साफ नजर आ रहा है। अगस्त का आधा महीना बीतने के बावजूद बांध में जलभराव की स्थिति संतोषजनक नहीं है। डैम का जलस्तर फिलहाल फुल रिजर्वायर लेवल से 5.04 मीटर नीचे है।

जलस्तर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यदि मानसून के बचे दिनों में बाणसागर के कैचमेंट क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो बांध का पूर्ण जलभराव स्तर के करीब पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसका सीधा असर आने वाले रबी सीजन में सिंचाई और बिजली उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।

एफआरएल 341.64 मीटर, अभी 336.60 मीटर जलस्तर

बाणसागर डैम का फुल रिजर्वायर लेवल 341.64 मीटर निर्धारित है। 14 अगस्त की स्थिति में बांध का जलस्तर 336.60 मीटर दर्ज किया गया। यानी डैम अभी अपने अधिकतम जलस्तर से 5.04 मीटर नीचे है।

फिलहाल बांध की कुल जलभराव क्षमता के मुकाबले करीब 56.36 प्रतिशत पानी ही मौजूद है। मौजूदा जल भंडारण 3060.15 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) बताया गया है, जबकि पूरी क्षमता पर बांध में 5426.61 MCM पानी संग्रहित किया जा सकता है।

पिछले साल से 4.11 मीटर पीछे

बाणसागर के मौजूदा जलस्तर की तुलना पिछले साल से करें तो स्थिति और चिंताजनक नजर आती है। पिछले वर्ष मध्य अगस्त में बांध का जलस्तर 340.71 मीटर तक पहुंच गया था। इस साल यह केवल 336.60 मीटर है।

इस तरह बाणसागर का जलस्तर पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 4.11 मीटर नीचे है। पिछले वर्ष मानसून की शुरुआत में इस क्षेत्र में अच्छी बारिश होने के कारण बांध में तेजी से पानी आया था।

आवक ज्यादा, डिस्चार्ज कम

हालांकि फिलहाल बाणसागर में पानी की आवक बांध से छोड़े जा रहे पानी से अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बांध में करीब 579.16 क्यूमेक्स पानी पहुंच रहा था, जबकि डैम से 265.79 क्यूमेक्स पानी डिस्चार्ज किया जा रहा था।

कैचमेंट क्षेत्र में छिटपुट बारिश होने से जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी की स्थिति बनी हुई है। लेकिन बांध को FRL के करीब ले जाने के लिए लगातार और पर्याप्त बारिश की जरूरत होगी।

रबी सीजन पर पड़ सकता है असर

बाणसागर में जलभराव की मौजूदा स्थिति ने आगामी रबी सीजन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि मानसून के बाकी समय में पर्याप्त पानी नहीं आया तो सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर किसानों की फसलों पर पड़ने की आशंका है।

इसके अलावा बांध से जुड़े बिजली उत्पादन पर भी कम जल भंडारण का असर पड़ सकता है। अब निगाहें मानसून के बचे हुए दिनों में बाणसागर के कैचमेंट क्षेत्र में होने वाली बारिश पर टिकी हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी