रीवाः एपीएस यूनिवर्सिटी ने मनाया 59वा स्थापना दिवस
रीवा, 20 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में सोमवार को 59वां स्थापना दिवस शम्भूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, अध्यात्म, मातृभाषा, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य समारोह से पहले कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं पर अतिथियों, कुलगुरु और आचार्यों ने माल्यार्पण किया। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
समारोह की शुरुआत मां वीणापाणि के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना, राष्ट्रीय गीत और कुलगीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न, तुलसी माला और तुलसी का पौधा देकर स्वागत किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जबलपुर के नरसिंह मंदिर गीताधाम के श्रीमद् नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य महाराज ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1968 में स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह के नाम पर इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। किसी संस्थान की नींव महान व्यक्तित्व रखते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक प्रतिष्ठा वहां के शिक्षक और विद्यार्थी अपने ज्ञान, संस्कार और उपलब्धियों से तैयार करते हैं। विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर भारतीय भाषाओं को अधिक महत्व देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण मूल दस्तावेजों में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द के प्रयोग को प्राथमिकता दी गई है।
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से जारी महत्वपूर्ण उपाधियों और दस्तावेजों में हिंदी भाषा के प्रयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहता। नए पाठ्यक्रमों के माध्यम से कौशल विकास को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
स्थापना दिवस समारोह में जल संरक्षण से जुड़े नए पाठ्यक्रम की योजना भी प्रमुख रूप से सामने आई। कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय जल संग्रहण और संरक्षण को अकादमिक अध्ययन का हिस्सा बनाने की दिशा में काम करने की योजना तैयार कर रहा है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम में जल से जुड़े विषयों को केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, भौगोलिक, दार्शनिक और सामाजिक पहलुओं से भी समझने का प्रयास किया जाएगा।
इस योजना में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों को एक मंच पर लाकर संयुक्त रूप से काम करने की तैयारी है। जल संकट, पारंपरिक जल स्रोतों, वर्षा जल संग्रहण, भूजल संरक्षण और आधुनिक जल प्रबंधन जैसे विषयों को बहुविषयक अध्ययन से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह का पाठ्यक्रम शोध और सामाजिक उपयोगिता दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय से लंबे समय तक जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. एस.एल. अग्रवाल को उनके शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ तृतीय श्रेणी कर्मचारी रुकसाना बेगम और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बृजनन्दन पटेल को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अतुल पाण्डेय की मौजूदगी में विश्वविद्यालय की प्रवेश विवरणिका का विमोचन किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें बीते वर्ष की शैक्षणिक गतिविधियों, संस्थागत उपलब्धियों और विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम का संचालन प्रो. श्रीकान्त मिश्र ने किया, जबकि कुलसचिव नीरजा नामदेव ने अतिथियों और उपस्थित लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य, आचार्य, अधिकारी, अतिथि विद्वान, कर्मचारी, विद्यार्थी, मीडिया प्रतिनिधि और शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों के कौशल संवर्धन और जल संरक्षण जैसे विषय प्रमुखता से चर्चा में रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी