राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने पर जबलपुर में गूंजा नारीशक्ति का राष्ट्रभाव

 


जबलपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को जबलपुर में नारीशक्ति, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। समिति के नर्मदा भाग द्वारा ‘अभ्युदय पथ संचलन’ तथा कृषि भाग द्वारा ‘राष्ट्रोदय पथ संचलन’ का आयोजन किया गया। एक ही दिन हुए इन दोनों संचलनों में गणवेशधारी सेविकाओं ने कदम से कदम मिलाकर संगठन की एकजुटता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया।

कदमों में अनुशासन, चेहरे पर आत्मविश्वास और मन में राष्ट्रसेवा का संकल्प लिए सेविकाएँ जब शहर की सड़कों से गुज़रीं, तो नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। नन्हीं बालिकाओं से लेकर वरिष्ठ सेविकाओं तक की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।

नर्मदा भाग का संचलन दोपहर 3:30 बजे मालवीय चौक स्थित अंजुमन इस्लामिया स्कूल से प्रारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं प्रखर वक्ता स्वप्ना गुप्ता उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता करुणा क्षत्रिय जी (प्रांत बौद्धिक टोली सदस्य, राष्ट्र सेविका समिति) ने अपने विचार रखे।

कृषि भाग का संचलन अधारताल स्थित धनी की कुटिया मैरिज गार्डन से हुआ, जहाँ शाम 4 बजे एकत्रीकरण रखा गया। मुख्य अतिथि डॉ. सखी वैश्य जी (कुलसचिव, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, अधारताल) रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में राजेश्वरी कौरव (नगर पुलिस अधीक्षक, अधारताल, जबलपुर) उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता मनीषा चौहान (प्रांत बौद्धिक टोली सदस्य एवं विभाग बौद्धिक प्रमुख, सिवनी) ने सेविकाओं का मार्गदर्शन किया।

नर्मदा भाग में आयोजित ‘अभ्युदय पथ संचलन’ को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता करुणाप्रभा क्षत्रिय ने राष्ट्र सेविका समिति की आद्य संचालिका वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर के जीवन और कार्यों का स्मरण किया। उन्होंने अपने उद्बोधन का आरंभ समिति की प्रार्थना की इन पंक्तियों से किया:

आनंद का हो भाव उर में

सत्य का पाथेय देना।

जब चुनौती सामने हो

शौर्यमय उत्साह देना।।

क्षत्रिय ने कहा कि आद्य संचालिका वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर ने नारी शक्ति के निरंतर जागरण, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और राष्ट्र निर्माण का कार्य किया। उन्होंने कहा कि मौसी जी द्वारा रोपा गया यह विचार आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है, जिसकी छाया में लाखों मातृशक्तियाँ राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित हैं।

संचलन के दौरान शहर में अनेक स्थानों पर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर सेविकाओं का अभिनंदन किया। उनकी अनुशासित कदमताल, गणवेश और एकजुटता ने सबका ध्यान खींचा। नागरिकों ने उत्साह से स्वागत करते हुए समिति की 90 वर्षों की साधना और समाज में उसके कार्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

राष्ट्र सेविका समिति पिछले 90 वर्षों से महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संस्कार, सेवा भावना और राष्ट्रभाव के जागरण के लिए कार्य कर रही है। समिति का मानना है कि संस्कारवान और जागरूक नारी से परिवार सशक्त होता है, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र मजबूत बनता है। इसी विचार को जन-जन तक पहुँचाने के लिए दोनों पथ संचलन आयोजित किए गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक