जीतू पटवारी का देशभर के पुलिसकर्मियों को खुला पत्र, स्वायत्तता को लेकर जताई चिंता
भोपाल, 24 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार काे मध्य प्रदेश पुलिस सहित देशभर के पुलिसकर्मियों के नाम एक महत्वपूर्ण खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में हाल की घटनाओं के संदर्भ में पुलिस तंत्र की स्वायत्तता, सम्मान और निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
पत्र में उन्होंने हाल ही में मध्य प्रदेश में एक भाजपा विधायक द्वारा एक आईपीएस अधिकारी को कथित रूप से धमकाने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे केवल व्यक्तिगत व्यवहार नहीं, बल्कि सत्ता के बढ़ते अहंकार और कानून-व्यवस्था पर उसके प्रभाव का संकेत बताया। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाती हैं, जहां राजनीतिक प्रभाव पुलिस तंत्र पर हावी होता दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार ऐसे उदाहरण सामने आते हैं, जिनमें सत्ताधारी दल के नेता पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने या उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का प्रयास करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पुलिस की प्रतिक्रिया को अक्सर सीमित, संयमित या मौन बताया, जिसे उन्होंने चिंताजनक स्थिति करार दिया।
अपने पत्र में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि किन परिस्थितियों ने देश के सबसे प्रशिक्षित और अनुशासित अधिकारियों को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। उन्होंने यह भी पूछा कि आम नागरिकों के प्रति सख्ती दिखाने वाली पुलिस प्रभावशाली व्यक्तियों के सामने कमजोर क्यों पड़ जाती है। पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब पुलिस निष्पक्ष और संविधान के दायरे में काम करती है, तो कोई भी व्यक्ति उस पर दबाव नहीं बना सकता। लेकिन जब राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ता है, तब पुलिस को दबाव और अपमान दोनों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आईपीएस एसोसिएशन द्वारा जारी हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि उसमें अपेक्षित आक्रोश के बजाय विवशता अधिक दिखाई देती है, जो एक सशक्त संस्था के लिए चिंता का विषय है।
जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि उनका यह पत्र पुलिसकर्मियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के विरुद्ध है जो पुलिस को उसकी संवैधानिक भूमिका से दूर कर रही हैं। उन्होंने पुलिस बल की कर्तव्यनिष्ठा, साहस और समर्पण की सराहना करते हुए संविधान के प्रति सर्वोच्च निष्ठा बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कानून लागू करने वाली संस्था ही असहाय या मौन दिखाई देगी, तो लोकतंत्र में आम नागरिक का विश्वास कमजोर हो जाएगा। अंत में उन्होंने देशभर के पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे अपने भीतर के साहस को पहचानें, निष्पक्षता बनाए रखें और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे