नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास, नौ हजार रुपये जुर्माना

 


राजगढ़, 9 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रजनीप्रकाश बाथम की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपित जुझारसिंह उर्फ रितिक वर्मा को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर नौ हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

प्रकरण में शासन की ओर से उप संचालक अभियोजन राजगढ़ आलोक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी डॉली गुप्ता ने पैरवी की।

अभियोजन के अनुसार, एक सितंबर 2025 को 13 वर्षीय पीड़िता अपने माता-पिता के साथ ब्यावरा शहर थाने पहुंची थी। उसने पुलिस को बताया था कि आरोपित उसके मोहल्ले में रहता है और करीब एक महीने से उससे बातचीत कर रहा था। घटना वाली रात आरोपित ने उसे लाल माता मंदिर के पीछे स्थित खाली भूखंड पर बुलाया। वहां उसने पीड़िता के विरोध के बावजूद उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

घर लौटने के बाद पीड़िता के रोने पर उसके माता-पिता ने कारण पूछा। इसके बाद उसने उन्हें पूरी घटना बताई। पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि आरोपित इससे पहले भी उसे मंदिर के पीछे बुलाकर कई बार दुष्कर्म कर चुका था।

मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने जुझारसिंह उर्फ रितिक वर्मा के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 87, 115(2), 64(2)(एम), 65(1) और 351(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से महत्वपूर्ण गवाहों के न्यायालय में बयान दर्ज कराए गए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के कथनों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपित को दोषी पाया। न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 के तहत दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा नौ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक