पूरी बिजली व्यवस्था का 'मस्तिष्क' है पावर मैनेजमेंट कंपनी का कंट्रोल रूम
जबलपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी का कंट्रोल रूम उस मस्तिष्क की तरह कार्य करता है, जो यह तय करता है कि किस समय कितनी बिजली कहाँ से ली जाए, किसे कितनी दी जाए और पूरी व्यवस्था सुरक्षित तथा संतुलित रहे।
यह बात पावर मैनेजमेंट के कार्यपालक निदेशक राजीव गुप्ता ने बुधवार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के जनसंचार विद्यार्थियों को दी। उल्लेखनीय है कि रानी दु्र्गावती विश्वविद्यालय के संचार अध्ययन एवं शोध विभाग के बीए मास कम्युनिकेशन द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी इन दिनों पावर मैनेजमेंट कंपनी के जनसम्पर्क कार्यालय में कार्य अनुभव हासिल कर रहे हैं।
विद्यार्थियों ने कंट्रोल रूम की रियल टाइम कार्यप्रणाली को देखा और महसूस किया कि यह पूरी प्रक्रिया कितनी जटिल व संवेदनशील है। इस दौरान उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और बताया कि मध्यप्रदेश में अभी तक की सर्वाधिक बिजली की मांग 19895 मेगावाट दर्ज हुई है जबकि प्रदेश में बिजली की उपलब्धता 26013 मेगावाट है।
कार्यपालक निदेशक राजीव गुप्ता ने विद्यार्थियों को जानकारी दी कि पावर मैनेजमेंट कार्यालय राज्य की विद्युत व्यवस्था का संचालन और समन्वय करने वाला प्रमुख केंद्र होता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्रों में मांग के अनुसार पर्याप्त और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध रहे।
जनसंचार के विद्यार्थियों को रियल टाइम मॉनीटर के माध्यम से जानकारी दी गई कि किस प्रकार पावर मैनेजमेंट कार्यालय राज्य की बिजली मांग, उत्पादन, खरीद, शेड्यूलिंग और ग्रिड समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित करता है कि मध्यप्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को यथासंभव निर्बाध और किफायती विद्युत आपूर्ति मिलती रहे।
कार्य अनुभव प्रशिक्षण सत्र के अंतर्गत वरिष्ठ छायाकार अजय धाबर्डे ने विद्यार्थियों को कैमरे के तकनीकी पक्ष की जानकारी दी और आउटडोर फोटोग्राफी का प्रशिक्षण दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक