दुनिया में चमका पन्ना जिले का हीरा, मिला जीआई टैग का प्रमाण-पत्र
पन्ना, 03 सितंबर (हि.स.)। देश दुनिया में रत्नगर्भा नगरी पन्ना में निकालने वाला बहुमूल्य रत्न हीरा अब देश ही नही विदेश में भी अपनी पहचान बनायेगा। इसके लिये पन्ना के हीरों के लिए जीआई टैग की घोषणा के बाद अब आधिकारिक प्रमाणपत्र का इंतजार खत्म हो गया है।
14 नवंबर 2025 को पन्ना के हीरे को जीआई टैग देने की घोषणा हुई थी। इसके बाद से ही हीरा कारोबारियों, खदान श्रमिकों और इस उद्योग से जुड़े लोगों की नजर औपचारिक प्रमाणपत्र पर टिकी थी। प्रमाणपत्र जारी होने के बाद खुशी का माहौल है।
जिला हीरा अधिकारी रवि पटेल ने गुरुवार को बताया कि जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक दस्तावेज तैयार कर संबंधित स्तर पर भेजे गए थे। जिसके बाद पन्ना के हीरे को जीआई टैग सर्टिफिकेट जारी किया गया। पन्ना की धरती से निकलने वाले हीरे अपनी गुणवत्ता और विशिष्ट प्राकृतिक विशेषताओं के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखते हैं। यहां मुख्य रूप से जेम क्वालिटी, ऑफ कलर और इंडस्ट्रियल क्वालिटी के हीरे मिलते हैं। इनकी गुणवत्ता का परीक्षण हीरा कार्यालय के विशेषज्ञ पारखियों द्वारा चमक, संरचना और पारदर्शिता जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है। प्राकृतिक रूप से दिखाई देने वाला हल्का हरापन समय के साथ अधिक स्पष्ट हो सकता है। हीरों में मिलने वाली कार्बन लाइन संरचना भी इन्हें विशिष्ट बनाती है। यही प्राकृतिक और भौगोलिक विशेषताएं पन्ना के हीरों को दूसरे क्षेत्रों से मिलने वाले हीरों से अलग पहचान देती हैं। जीआई टैग केवल किसी उत्पाद की पहचान नहीं, बल्कि उसकी भौगोलिक विरासत और विशिष्टता का कानूनी संरक्षण भी है। प्रमाणपत्र जारी होने के बाद पन्ना डायमंड नाम का इस्तेमाल दूसरे क्षेत्रों के उत्पादों के लिए मनमाने ढंग से करना आसान नहीं होगा। इससे पन्ना के वास्तविक हीरों की पहचान और ब्रांड वैल्यू को संरक्षण मिलेगा। हीरा कारोबारियों के लिए भी यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है। जीआई टैग के औपचारिक प्रमाण-पत्र से पन्ना के हीरों की पहचान अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे