मंदसौरः बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान अफीम किसानों को, फसल हंकाई की मांग
मंदसौर, 22 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में बीते दो दिन में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां अकेले 320 किसानों ने अफीम फसल पूरी तरह नष्ट होने पर हंकाई के लिए आवेदन किया।
इसके मुकाबले पूरे प्रदेश में 56 हजार से ज्यादा लाइसेंसधारी किसानों में से सिर्फ 893 ने ही आवेदन किया है, जिसमें 798 की फसल पूरी तरह और 95 की आंशिक रूप से प्रभावित बताई गई। आंकड़े बताते हैं कि मंदसौर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, लेकिन प्रदेश स्तर पर नुकसान सीमित ही रहा।
नारकोटिक्स विभाग की ओर से रविवार को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 798 किसानों ने खेत में खड़ी अफीम फसल को पूरी तरह से उखड़वाने का आवेदन किया है। 95 किसान ऐसे हैं जिन्होंने आंशिक हंकाई के लिए आवेदन किए हैं। विभाग को मिले आवेदनों में नीमच भाग एक में कुल 134, भाग दो में 171 और भाग तीन में 53 आवेदन मिले। इसी प्रकार मंदसौर भाग एक से 49, भाग दो 320 और भाग तीन से 31 आवेदन मिले। जावरा भाग एक से 57 व भाग दो से 37 तथा गरोठ से कुल 41 किसानों ने अफीम फसल हंकाई के लिए आवेदन किए हैं।
प्रकृति ने इस साल अफीम काश्तकारों पर आफत बरसाई थी। पहले बार हुई ओलावृष्टि से नीमच भाग एक में अफीम फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ था। दूसरी बार हुई ओलावृष्टि में मंदसौर भाग दो में अफीम फसल सबसे अधिक प्रभावित हुई थी। नीमच में 134 और मंदसौर में 320 किसान बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इन किसानों के खेतों में खड़ी अफीम की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। पौधों से अफीम के डोडे टूटकर जमीन पर गिर गए थे। प्रदेश में अफीम फसल 2025-25 में परम्परागत खेती (चीरा लगाने वाली) के कुल 38 हजार 801 और सीपीएस पद्धति के 17 हजार 548 लाइसेंस इस प्रकार कुल 56 हजार 349 किसानों को अफीम खेती के लिए विभाग ने लाइसेंस जारी किए थे।
बीमारी, देर से बुवाई भी हंकाई के कारण
ऐसा नहीं है कि ओलावृष्टि की वजह से ही अफीम फसल प्रभावित हुई थी। फसल हंकाई के लिए किसानों ने जो आवेदन दिए हैं उसके अन्य कारण भी हैं। फसल बुवाई में देरी, फसल में बीमारी लगना, अत्यधिक मात्रा में रसायन का उपयोग करना आदि। इन कारणों के चलते जब किसानों को यह लगता है कि नारकोटिक्स विभाग को तय मात्रा में अफीम नहीं दे पाएंगे तब आंशिक या पूर्ण रूप से फसल हंकाई के लिए आवेदन किए गए हैं।
अप्रैल प्रथम सप्ताह में तौल संभावित
प्रदेश के जिन किसानों ने अफीम फसल हंकाई के लिए आवेदन किए हैं उनके से अधिकांश की फसल हंकाई का कार्य हो चुका है। शेष किसानों के यहां आगामी एक पखवाड़े में हंकाई कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। जिन किसानों की प्राकृतिक आपदा से फसल प्रभावित नहीं हुई है उनमें से अधिकांश ने अफीम संग्रहण कार्य पूर्ण कर लिया है। सीपीएस पद्धति से अफीम खेती करने वाले किसानों को इस साल डोडे घर ले जाकर खसखस निकालने की अनुमति दी गई है। यह कार्य अभी चल रहा है। बताया जा रहा है कि अप्रैल प्रथम सप्ताह में अफीम तौल कार्य भी प्रारंभ होने की पूरी संभावना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया