तीर्थ पर किए पाप का भोग करना ही पड़ता है : मुनि श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी

 


मंदसौर, 9 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में त्रिस्तुतिक संघ एवं चातुर्मास समिति के तत्वावधान में जीवागंज स्थित राजेन्द्रविलास भवन में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के अवसर पर विशेष धर्मसभा का आयोजन किया जा रहा है। प.पू. मुनि श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी म.सा. एवं श्री पवित्ररत्नविजयजी म.सा. की पावन निश्रा में प्रतिदिन प्रातः 8.30 से 11 बजे तक धर्मसभा एवं प्रवचन हो रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हो रहे हैं।

पर्युषण पर्व के द्वितीय दिवस बुधवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी ने कहा कि सामान्य स्थान पर किए गए पापों का तीर्थस्थल पर जाकर प्रायश्चित किया जा सकता है, लेकिन तीर्थ स्थान पर किए गए पापों का भोग करना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि पर्युषण महापर्व भी एक प्रकार का तीर्थ है, जो इन दिनों स्वयं चलकर हमारे घर आया है। इसलिए इन आठ दिनों में हमें पाप कर्मों से बचते हुए अधिक से अधिक पुण्य अर्जित करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने पर्युषण पर्व के पांच दैनिक कर्तव्यों के साथ ही श्रावक-श्राविकाओं के लिए आवश्यक बताए गए 11 वार्षिक कर्तव्यों की जानकारी दी। मुनि श्री ने कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान पांच कर्तव्यों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इनमें अमारी प्रवर्तन, सधर्मी भक्ति, क्षमापना, अठम तप और चैत्र परिपाटी शामिल हैं।

मुनि श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी ने कहा कि पर्युषण पर्व को तप, संयम और प्रभु के प्रति समर्पण की भावना के साथ मनाना चाहिए। इन पांच कर्तव्यों का पालन पर्व की आध्यात्मिक साधना को सार्थक बनाता है।

त्रिस्तुतिक संघ चातुर्मास समिति की ओर से जनकूपुरा स्थित अजीतनाथजी मंदिर में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रतिदिन रात्रि 8 से 11 बजे तक प्रभु भक्ति का आयोजन हो रहा है। रतलाम के त्रिलोक बैरागी अपने साथी कलाकारों के साथ भक्ति कार्यक्रम की प्रस्तुति दे रहे हैं।

इसके अलावा दोपहर के समय अजीतनाथजी मंदिर में आंगी रचना की जा रही है। आकर्षक आंगी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया