अनूपपुर: इंगांराजविवि में शोधार्थियों के लिए एआई उपकरणों पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
अनूपपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (इंगांराजविवि) के डॉ. आंबेडकर चेयर एवं अर्थशास्त्र विभाग द्वारा शुक्रवार को शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शोध उपकरणों पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “शोधकर्ताओं के लिए एआई उपकरण: एलिसिट, कंसेंसस, रिसर्च रैबिट, कर्सर एआई एवं शोध में अन्य उभरते एआई अनुप्रयोग” रहा।
कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने किया। उन्होंने कंप्यूटर एवं प्रौद्योगिकी के विकास की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐसे में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को समय के साथ स्वयं को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। उन्होंने शोध कार्यों में आधुनिक तकनीकों एवं एआई आधारित उपकरणों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
इस अवसर पर प्रभारी कुलपति एवं अन्य अतिथियों ने “डॉ. आंबेडकर की जनजातीय विकास की दृष्टि” तथा “भारत में जनजातीय विकास के प्रति डॉ. आंबेडकर की धारणा” पुस्तकों का विमोचन भी किया। कार्यशाला की थीम एवं विषय-वस्तु पर डॉ. आंबेडकर चेयर के निदेशक प्रो. तनमय कुमार घोराई ने विस्तार से जानकारी दी, जबकि अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रक्षा सिंह ने विशेष संबोधन दिया।
कार्यशाला में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोहित राजा तथा इंगांराजविवि के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आनंद मेहर ने संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया। विशेषज्ञों ने एलिसिट, कंसेंसस, रिसर्च रैबिट और कर्सर एआई जैसे आधुनिक एआई उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग तथा शोध प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और उपयोगी बनाने में उनकी भूमिका की जानकारी दी।
कार्यशाला में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम में कुल 210 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम का प्रायोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. तनमय कुमार घोराई एवं प्रो. रक्षा सिंह ने किया, जबकि डॉ. विमल राज ए. एवं डॉ. बिमलेश सिंह सह-संयोजक रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला