एनटीए को चाहिए विषय विशेषज्ञ और 13 भाषाओं के अनुवाद समीक्षक, मप्र के शोधकर्ताओं के लिए भी है अवसर
भोपाल, 17 सितंबर (हि.स.)। देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का फैसला करने वाली नीट-यूजी और जेईई-मेन जैसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी अब नए विशेषज्ञों के हाथों में देने की तैयारी है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और प्रश्नपत्रों की समीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए देशभर के शिक्षकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों के साथ 13 भाषाओं में परीक्षा सामग्री के अनुवाद की समीक्षा करने वाले विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
मध्य प्रदेश के विशेषज्ञों के लिए भी बड़ा अवसर
इस पूरी प्रक्रिया का मध्य प्रदेश से सीधा संबंध इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य से हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं। मध्य प्रदेश से लगभग 1.21 लाख (1,21,501) विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। जिसमें से नीट-यूजी 2026 परीक्षा में लगभग 1.18 लाख (1,18,244) छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। । ऐसे में प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर उसकी भाषा, कठिनाई और शैक्षणिक स्तर तक में मध्य प्रदेश के विशेषज्ञों की भागीदारी राज्य के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
खास बात यह है कि एनटीए की इस पहल में किसी एक राज्य तक विशेषज्ञता सीमित नहीं रखी गई है। यानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन सहित प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों से जुड़े योग्य शिक्षक और विषय विशेषज्ञ भी इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
पुराने ढांचे की जगह नई विशेषज्ञ टीम
नीट-यूजी 2024 के बाद राष्ट्रीय परीक्षाओं की प्रश्नपत्र निर्माण और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा हुई थी। एनटीए ने उस परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को आधिकारिक रूप से खारिज किया था और कहा था कि उसके सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सभी प्रश्नपत्रों का हिसाब था। इसके बावजूद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच प्रश्नपत्र निर्माण और समीक्षा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत सामने आई। अब एनटीए विषय विशेषज्ञों का नया व्यापक पैनल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एनटीए की अपनी परीक्षा-विकास नीति में भी विषय विशेषज्ञों, परीक्षा विशेषज्ञों, समीक्षकों, संपादकों और शिक्षकों को प्रश्न तैयार करने तथा उनकी बहुस्तरीय समीक्षा में शामिल करने की व्यवस्था का उल्लेख है।
प्रश्न बनाना ही नहीं, कठिनाई भी जांचेंगे
एनटीए के लिए चुने जाने वाले विषय विशेषज्ञों की भूमिका सिर्फ प्रश्न लिखने तक सीमित नहीं होगी। उन्हें निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप प्रश्न तैयार करने होंगे। इसके बाद प्रश्नों की अवधारणात्मक शुद्धता, स्पष्टता और कठिनाई के स्तर की समीक्षा भी की जाएगी। परीक्षा के ब्लूप्रिंट के अनुसार प्रश्नों का संतुलन बनाए रखना, अलग-अलग स्तर की बौद्धिक क्षमता को परखने वाले प्रश्न तैयार करना और प्रश्नपत्र की समग्र गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी का हिस्सा होगा। एनटीए की ओर से प्रश्नों के निर्माण में गुणवत्ता और निष्पक्षता के लिए बहुस्तरीय समीक्षा की आवश्यकता पहले से रेखांकित की गई है।
प्रदेश में हिन्दी विशेषज्ञों की भूमिका अहम
मध्य प्रदेश के लिए इस पहल का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भाषा से जुड़ा है। एनटीए राष्ट्रीय परीक्षाओं की सामग्री कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराता है। अब 13 भाषाओं के अनुवाद समीक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। इन विशेषज्ञों का काम अंग्रेजी या मूल भाषा में तैयार परीक्षा सामग्री के अनुवाद की समीक्षा करना होगा। इसमें शब्दों की सटीकता, अर्थ की स्पष्टता, भाषाई एकरूपता और विषय के मूल आशय को बनाए रखना शामिल होगा।
हिन्दी माध्यम से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए यह जिम्मेदारी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि एक छोटे से भाषाई अंतर से भी किसी प्रश्न का अर्थ बदल सकता है।यही कारण है कि मध्य प्रदेश के हिन्दी भाषा विशेषज्ञ, विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधकर्ता और विषय विशेषज्ञ इस पैनल का हिस्सा बनकर राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में सीधे योगदान दे सकते हैं। दूसरी ओर मप्र देश के केंद्र में होने से यहां प्राय: हर भाषा के विद्वान बड़ी संख्या में निवासरत हैं, ऐसे में वे भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
एआई से अनुवाद, विशेषज्ञ करेंगे अंतिम जांच
एनटीए की नई व्यवस्था में अनुवाद प्रक्रिया की समीक्षा भी महत्वपूर्ण बनाई जा रही है। परीक्षा सामग्री के अनुवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों का उपयोग होने की स्थिति में भाषा विशेषज्ञों की भूमिका और बढ़ जाती है। मशीन से तैयार अनुवाद में शब्द भले सही हों, लेकिन किसी वैज्ञानिक, गणितीय या तकनीकी अवधारणा का संदर्भ गलत हो सकता है, इसलिए अनुवाद समीक्षक यह देखेंगे कि प्रश्न का मूल अर्थ दूसरी भाषा में भी उसी स्पष्टता के साथ पहुंच रहा है या नहीं। सांस्कृतिक और भाषाई संदर्भों के स्तर पर भी प्रश्न की उपयुक्तता जांची जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी