उज्जैनः अस्पताल में उपचार के दौरान युवक की मौत के बाद हंगामा

 


उज्जैन, 27 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में फ्रीगंज स्थित लोटस अस्पताल में भर्ती 17 वर्षीय किशोर की मौत के बाद सोमवार को जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर माधवनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से लिखित आवेदन लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।

माधवनगर थाना पुलिस ने बताया कि ग्राम बिशनखेड़ी निवासी 17 वर्षीय मनोज पुत्र दिनेश चौहान को 11 दिन पहले अचानक पेट में तेज दर्द की होने लगा। जिसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए फ्रीगंज स्थित लोटस अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर जांच के दौरान चिकित्सक ने पेट में गठान होने की बात बताते हुए ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद मनोज की तबीयत में सुधार होने लगा था और परिजनों को भी उसके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद थी। रविवार को मनोज ने दोबारा पेट में दर्द होने की शिकायत की। दर्द बढऩे पर उन्होंने अस्पताल स्टाफ से ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक को बुलाने की मांग की। इस पर उन्हें बताया गया कि वे छुट्टी पर हैं। परिवार ने किसी विशेषज्ञ को बुलाने की बात कही, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने भरोसा दिलाया कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ही मरीज का उपचार करते रहे।

इसी बीच शाम होते-होते मनोज की पेट दर्द से हालत ज्यादा खराब हो गई, लोटस अस्पताल के डॉक्टर ने उसे आईसीयू में भर्ती कर दिया और परिजनों को आश्वासन देते रहे। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें पूरी रात आईसीयू के अंदर जाने नहीं दिया गया। वे लगातार बेटे से मिलने और उसकी हालत जानने की कोशिश करते रहे, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने अनुमति नहीं दी।

सुबह आईसीयू पहुंचे पिता, तब पता चली मौतसोमवार सुबह जब पिता दिनेश चौहान आईसीयू पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बेटे को ऑक्सीजन लगी हुई है। उन्होंने अस्पताल स्टाफ से उसकी स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब उन्होंने मनोज से बात करने की कोशिश की तो उन्हें पता चला कि उसकी पहले ही मौत हो चुकी है।

विशेषज्ञ डॉक्टर को नहीं बुलायाइसके बाद परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि रविवार दोपहर तक मनोज की हालत सामान्य थी, लेकिन दर्द बढऩे के बाद समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर को नहीं बुलाया गया। उनका यह भी कहना है कि आईसीयू में भर्ती करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज की वास्तविक स्थिति से परिवार को पूरी तरह अनभिज्ञ रखा।

हंगामे की सूचना मिलने पर माधवनगर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले को शांत कराया। इसके बाद परिजनों को थाने बुलाकर उनकी लिखित शिकायत दर्ज की गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉक्टर सिद्धार्थ को भी थाने बुलाया गया, जहां उन्होंने मनोज के उपचार से जुड़े दस्तावेज और इलाज संबंधी लिखित जानकारी पुलिस को सौंपी।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल