अनूपपुर: राष्ट्रीय लोक अदालत में 899 प्रकरणों का निराकरण, 1.40 करोड़ से अधिक की राशि अवॉडिड
अनूपपुर, 09 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय अनूपपुर सहित तहसील सिविल न्यायालय कोतमा/ राजेन्द्रग्राम में राष्ट्रीय लोक अदालत सहित 14 खण्डपीठों का गठन किया गया था। जिसमे कुल 899 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें कुल राशि 1,40,05,122/-(एक करोड़ चालीस लाख पांच हजार एक सौ बाईस रूपयें) की राशि अवार्ड की गई। वहीं जेल पहुंचे आरोपी ने आत्मसमर्पण कर राजीनामे से हुआ विवाद का समाधान किया गया।
जिला न्यायालय अनूपपुर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माया विश्वलाल ने मॉ सरस्वती के चित्र में पुष्पमाला अर्पित एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय मनोज कुमार लढ़िया, प्रथम जिला न्यायाधीश/संयोजक नेशनल लोक अदालत नरेन्द्र पटेल, तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीकृष्ण डागलिया, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी चैनवती ताराम, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रावेन्द्र कुमार सोनी, सुधा पाण्डेय न्यायिक मजिस्ट्रेयट, बॉबी सोनकर न्यायिक मजिस्ट्रेमट, सृष्टि साहू न्यायिक मजिस्ट्रे ट, अर्पण चैधरी प्रषिक्षु जज, जिला विधिक सहायता अधिकारी बृजेश पटेल, जिला अधिवक्ता बार संघ से अध्यक्ष संतोष सिंह परिहार, सचिव राम कुमार राठौर, शासकीय अभिभाषक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा, लीगल एड डिफेंस काउंसेल संतदास नापित, जिला अधिवक्ता संघ के समस्त अधिवक्तागण खण्डपीठ के सुलहकर्ता सदस्यगण, पैरालीगल वालेंटियर्स, पुलिस बल, बैंक, नगर पालिका, विद्युत विभाग, जिला न्यायालय एवं जिला प्राधिकरण अनूपपर के समस्त अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहें।
जिले की राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने त्वरित न्याय और आपसी समझौते की नई मिसाल बन गई। विद्युत प्रकरण से जुड़े मामले में जहां पूर्व में दो आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट के तहत जिला जेल भेजा गया था, तीसरे आरोपी ने स्वयं न्यायालय पहुंचकर आत्मसमर्पण किया और राजीनामे के माध्यम से पूरे मामले का समाधान हो गया।
आरोपी ने किया आत्मसमर्पण कर विवाद का हुआ निराकरण
जानकारी के अनुसार, 02 मई 2026 को न्यायाधीश सुधा पाण्डेय के न्यायालय द्वारा विद्युत प्रकरण में आरोपी मनोज कुमार राठौर एवं दीपक गुप्ता को गिरफ्तारी वारंट के आधार पर जिला जेल अनूपपुर भेजा गया था। इसके बाद लोक अदालत में मामले ने सकारात्मक मोड़ लिया, जब प्रकरण के अन्य आरोपी 60 वर्षीय एहसान अली पिता वाजिद अली, निवासी अनूपपुर ने स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर आत्मसमर्पण किया। और 31,069/- रुपये की राशि जमा कर आपसी राजीनामे के आधार पर विवाद का निराकरण किया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि त्वरित न्याय के साथ समाज में सौहार्द और समझौते की भावना को बढ़ावा देना भी है। लोक अदालत के माध्यम से हुए इस समाधान ने यह संदेश दिया कि संवाद और सहमति से बड़े से बड़े विवाद भी समाप्त किए जा सकते हैं।
विभा चतुर्वेदी बनाम संदीप चतुर्वेदी के प्रकरण का निराकरण
विभा चतुर्वेदी बनाम संदीप चतुर्वेदी को भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता धारा 144 का प्रकरण 28 जून 2025 को प्रस्तुत किया गया। जिसका निराकरण आपसी समझौता लोक अदालत के माध्यम से निराकरण हुआ। हाल निवासी अनूपपुर आवेदिका, अनावेदक निवासी पिपरहा पोस्ट तिवनी तहसील मनगवां जिला रीवा वर्षा रानी सिसोदिया बनाम 41 वर्षीय नोखे लाल पुत्र रामकृष्ण निवासी ग्राम रेल्वे कालोनी सिद्ध बाबा अनूपपुर बीएनएसएस 144 के तहत 26 मार्च 2026 को प्रस्तुत किया गया। जिसका निराकरण लोक अदालत में किया गया।
1 वर्ष अलग पति पत्नि एक हुए
30 वर्षीय पूजा गुप्ता उम्र पति अनुज गुप्ता निवासी सतना दोनों 1 वर्ष अलग-अलग रहने लगे थे। आज दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं और न्यायाधीष के समझाईस से दोनों के मध्य राजीनामा होने से दोनों खुशी-खुशी घर चले गये। विवाद का निराकरण किया गया है।
7 वर्ष बाद भाई-भाई का विवाद, रिश्तो की हुई जीत कोर्ट ने कहा- रिश्ते मुकदमों से बड़े है
सालों की कानूनी खींचतान और आपसी कड़वाहट के बाद आखिरकार रिश्तों की जीत हुई है। एक मामूली बहस से शुरू हुआ और मारपीट की आपराधिक धाराओं तक पहुंचा दो सगे भाइयों का सात साल पुराना संपत्ति के बंटवारे का विवाद शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलझ गया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में थाना कोतमा अंतगर्त ग्राम रेउला में संपत्ति के बंटवारे को लेकर बड़े भाई लीलमन और छोटे भाई गोविंद के बीच कहासुनी हुई थी। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया। पिछले सात वर्षों से यह मामला स्थानीय अदालत में लंबित था। कई दौर की बातचीत और समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से समझौते पर पहुंचे। राष्ट्री य लोक अदालत के न्यायाधीश अमनदीप सिंह छाबड़ा ने समझौते को मंजूरी देते हुए दोनों भाइयों के प्रकरण समाप्त कर कहा, खून के रिश्तों को मुकदमेबाजी में नहीं झोंकना चाहिए।परिवार के बुजुर्ग पिता ने बताया कि दोनों भाइयों के बीच सुलह की यह खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे जीवन का सबसे बड़ा बोझ उतर गया। सात साल बाद आज इस घर में फिर से एक साथ खाना पकेगा।स्थानीय निवासियों ने इस समाधान का स्वागत किया और कहा कि आपसी विवादों को बातचीत और लोक अदालत के माध्यम से सुलझाना ही बेहतर विकल्प है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला