नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी रेल लाइनों से मप्र के पर्यटन क्षेत्र को मिलेगी मजबूती: मोहन यादव
- केंद्रीय कैबिनेट समिति द्वारा रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति देने पर मप्र के मुख्यमंत्री ने माना प्रधानमंत्री का आभार
भोपाल, 05 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक कार्य समिति द्वारा नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को स्वीकृति दी है। इस परियोजना से बाबा महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन एवं कूनो राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और अधिक सुगम होगा। यही नहीं , लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को स्वीकृति देने के निर्णय के लिए केंद्रीय कैबिनेट की आर्थिक कार्य समिति का आभार माना है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
केंद्रीय मंत्री-मंडल की आर्थिक कार्य समिति ने मंगलवार को को 'पीएम गति शक्ति' के तहत रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं की मंजूरी का निर्णय लिया है। लगभग 23 हजार 437 करोड़ रुपये की तीन महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के पूरा होने से मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में कनेक्टिविटी बढ़गी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और भीड़ कम होने के साथ हर साल 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी। छह राज्यों के लगभग 83 लाख लोगों को इससे प्रत्यक्ष लाभ होगा। स्वीकृत परियोजना से ट्रेनों की प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर, उज्जैन और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के साथ ही राजस्थान के रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ), श्री नेटिकंती अंजनेय स्वामी वारी मंदिर (कासापुरम), श्यामनाथ मंदिर, नैमिषारण्य (नीमसर) सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा और इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर, उर्वरक जैसी वस्तुओं के परिवहन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर