नागदा में सद्भावना मैराथन में दौड़े सैकड़ों विद्यार्थी, एकता और भाईचारे का दिया संदेश

 




नागदा, 20 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा में पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर गुरुवार को शहर कांग्रेस और युवक कांग्रेस के संयुक्त तत्वावधान में सद्भावना मैराथन का आयोजन किया गया। पिछले दो दशक से आयोजित हो रही इस मैराथन में विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और शांति, एकता तथा भाईचारे का संदेश दिया।

एयरड्रोम पट्टी से पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। मैराथन से पहले विद्यार्थियों को आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष करने, संविधान की रक्षा करने तथा देश की एकता, अखंडता और सद्भावना बनाए रखने की शपथ दिलाई गई।

युवा शक्ति को सक्षम बनाना था राजीव गांधी का सपना

मैराथन के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने कहा कि सद्भावना मैराथन महज एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि स्वर्गीय राजीव गांधी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करने का सपना देखा था। उनके कार्यकाल में कंप्यूटर और संचार क्रांति के साथ शिक्षा एवं तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

विभिन्न वर्गों में विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार

कक्षा नौवीं से बारहवीं के बालक वर्ग में कृतज्ञ मीणा ने प्रथम, यशराज ने द्वितीय और कुणाल प्रजापत ने तृतीय स्थान हासिल किया। बलवीर पटेल और आतिफ को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इसी वर्ग के बालिका वर्ग में महक साहनी प्रथम, किरण दिनेश द्वितीय और लक्षिता तृतीय रहीं। मानवी राणावत और अशिता शर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

कक्षा पांचवीं से आठवीं के बालक वर्ग में राहुल सिसोदिया प्रथम, जय शुक्ला द्वितीय और दक्षराज तृतीय रहे। अंश साहनी और एलन को सांत्वना पुरस्कार मिला। बालिका वर्ग में मोनिका ने प्रथम, विवन्या गेहलोत ने द्वितीय और श्रेष्टी कुशवाह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतिभा गौतम और मदिरा खान को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले चारों विजेताओं को रेंजर साइकिल, प्रतीक चिन्ह और प्रमाण-पत्र दिए गए। द्वितीय स्थान के विजेताओं को दो-दो हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 1500-1500 रुपये के साथ प्रतीक चिन्ह और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। सांत्वना पुरस्कार के रूप में 500-500 रुपये दिए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / कैलाश सनोलिया