बिजली लाइनों के पास निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, 10 अधिकारियों को नोटिस
जबलपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शहर में अति उच्चदाब बिजली लाइनों के नीचे और उनके निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में मकान, पार्क तथा कॉलोनियों के निर्माण की अनुमति दिए जाने के आरोपों पर सख्ती दिखाई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने शुक्रवार को ग्रीष्म जैन एवं अमित पटेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी किए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिजली लाइनों के आसपास निर्माण से नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिजली लाइनों के आसपास निर्माण से नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि एमपी ट्रांसको के ईटीएच मेंटेनेंस विभाग के मुख्य अभियंता ने बिजली लाइनों के आसपास निर्माण से संबंधित जानकारी जिला दंडाधिकारी, जबलपुर को दी थी। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं के अनुसार, समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उच्च वोल्टेज वाली विद्युत लाइनों के आसपास निर्धारित सुरक्षा मानक उपायों का पालन नहीं किया गया तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
हाईकोर्ट ने मामले में जिन अधिकारियों और विभागों से जवाब मांगा है, उनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग; अतिरिक्त मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग; एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक; मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता शामिल हैं। इसके अलावा जिला दंडाधिकारी, जबलपुर; पुलिस अधीक्षक, जबलपुर; संयुक्त संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा नगर निगम आयुक्त को भी नोटिस जारी किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा और लावण्या वर्मा ने पक्ष रखा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक