एमपीएनआरसी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पर सवाल, गधे की फोटो और फर्जी डिटेल भरकर किया आवेदन, फिर भी जारी हुआ नर्सिंग सर्टिफिकेट

 


भोपाल, 29 सितंबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एमपीएनआरसी) की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का दावा है कि उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का परीक्षण करते हुए आवेदन में आवेदक के नाम, माता-पिता के नाम और अन्य जानकारियां मनमाने ढंग से दर्ज कीं। फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर और शैक्षणिक दस्तावेजों के स्थान पर ब्लैंक पेपर अपलोड किए। इसके बावजूद आवेदन आगे बढ़ा और फीस जमा करने के बाद नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया।

परमार के मुताबिक, उन्होंने आवेदन में आवेदक के नाम के स्थान पर ‘डंकी’, पिता के नाम में ‘डंकी फादर’, माता के नाम में ‘डंकी मदर’ और जाति के कॉलम में ‘एनिमल’ दर्ज किया। पता और अन्य जानकारियां भी मनमाने तरीके से भरी गईं। आवेदन में फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर अपलोड की गई।

10वीं-12वीं के अंक भी मनमाने भरे

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है कि आवेदन में 10वीं और 12वीं के अंक एवं रोल नंबर भी मनमाने तरीके से दर्ज किए गए। ट्रेनिंग सेंटर के रूप में भोपाल नर्सिंग कॉलेज और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) का नाम दर्ज किया गया। ट्रेनिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डिग्री/डिप्लोमा सर्टिफिकेट की जगह दो ब्लैंक पेपर अपलोड किए गए।

इसके बाद 2500 रूपये ऑनलाइन फीस जमा की गई। परमार के अनुसार, भुगतान के करीब पांच मिनट बाद ऑनलाइन नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जनरेट हो गया। उन्होंने इसका वीडियो भी जारी किया है, जिसमें कथित तौर पर रजिस्ट्रेशन नंबर और डिजिटल साइन वाला प्रमाणपत्र दिखाई दे रहा है।

दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल

एमपीएनआरसी की ऑनलाइन सेवा पर नए रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। परिषद की ऑनलाइन सेवा पर जारी निर्देशों में कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन फॉर्म के साथ लगाए जाने वाले दस्तावेज कॉलेज के प्राचार्य द्वारा सत्यापित होना अनिवार्य है और सत्यापन नहीं होने पर परिषद आवेदन स्वीकार नहीं करेगी।

ऐसे में परमार द्वारा किए गए कथित परीक्षण ने यह सवाल खड़ा किया है कि यदि आवेदन में वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेज और सही व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध नहीं थी, तो वह किस स्तर पर सत्यापन के बाद आगे बढ़ा और प्रमाणपत्र कैसे जारी हुआ।

तकनीकी और प्रशासनिक जांच की मांग

रवि परमार ने मामले की तकनीकी और प्रशासनिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आवेदन की जांच किस स्तर पर हुई, दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और प्रमाणपत्र जनरेट होने की प्रक्रिया में कौन-कौन से तकनीकी एवं प्रशासनिक चरण शामिल थे। उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था संचालित करने वाली एजेंसी एमपी ऑनलाइन की भूमिका की भी जांच की मांग की है। परमार के मुताबिक, उन्होंने एमपीएनआरसी अध्यक्ष बीनू कुशवाह से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी ओर से प्रतिक्रिया नहीं मिली। एनएसयूआई ने मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे