मध्य प्रदेश में 600 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता पर युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग
भोपाल, 26 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में करीब 600 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर युवा कांग्रेस ने बुधवार को उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और वित्त मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से नकली नोटों की गड्डियां हवा में उछालकर विरोध दर्ज कराया।
दोपहर करीब 2 बजे कार्यकर्ता नकली नोटों की गड्डियां लेकर वित्त मंत्री के बंगले पहुंचे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से नोट सौंपने के लिए अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने बंगले के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर टीटी नगर थाने पहुंचाया। प्रदर्शन के बाद सड़क पर नोटों की गड्डियां बिखरी नजर आईं।
कांग्रेस ने वित्त मंत्री की जवाबदेही पर उठाए सवाल
युवा कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग के अधीन सरकारी भुगतान प्रणाली में करीब 600 करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका कहना था कि मामले में निचले स्तर पर कार्रवाई हुई है, लेकिन बड़े स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई। कांग्रेस ने मांग की कि जांच के दायरे में आने वाले सभी अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जाए। परमार ने कहा कि वित्त विभाग के रहते इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने पर वित्त मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की तो युवा कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज करेगी। प्रदर्शन में युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव धनजी गिरी, एनएसयूआई प्रदेश सचिव अमन पठान, जिला सचिव अभय सोलंकी रामभक्त और जिला युवा कांग्रेस ग्रामीण उपाध्यक्ष प्रिंस सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
देवड़ा बोले- भारतीय मुद्रा का अपमान किया गया
प्रदर्शन को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा नोटों को सड़क पर फेंकना भारतीय मुद्रा का अपमान है। उन्होंने कहा कि विरोध दर्ज कराने के लिए इस तरह का तरीका अपनाया जाना उचित नहीं है। वित्तीय अनियमितताओं के मामले में देवड़ा ने कहा कि सरकारी भुगतान में गलत खातों में राशि ट्रांसफर होने की जानकारी वित्त विभाग की तकनीकी निगरानी व्यवस्था और एआई आधारित सॉफ्टवेयर के जरिए सामने आई। उनके मुताबिक, मामले में एफआईआर दर्ज की गई हैं और सरकारी राशि की रिकवरी की कार्रवाई भी जारी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
59 एफआईआर, 400 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में
सरकारी भुगतान में सामने आई अनियमितताओं की जांच कोष एवं लेखा संचालनालय की स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (एसएफआईसी) कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले करीब पांच वर्षों में सरकारी भुगतान प्रणाली से जुड़े विभिन्न मामलों में लगभग 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं चिन्हित की गई हैं। जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार अब तक 59 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 400 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। जांच में सरकारी राशि के निजी बैंक खातों तथा कुछ मामलों में अधिकारियों-कर्मचारियों के परिजनों और परिचितों से जुड़े खातों में ट्रांसफर किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 305 करोड़ रुपये के 199 संदिग्ध लेनदेन चिन्हित किए गए हैं, जबकि करीब 293 करोड़ रुपये ऐसी राशि के रूप में सामने आए हैं, जिन्हें नियमों के अनुसार ट्रेजरी के पर्सनल डिपॉजिट खातों में रखा जाना था, लेकिन अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
भुगतान प्रणाली की खामियों की भी जांच
जांच में सरकारी भुगतान प्रणाली में कई तकनीकी और प्रशासनिक कमियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें डुप्लीकेट कर्मचारी कोड बनाए जाना, लॉगिन-पासवर्ड साझा करना, पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलकर ओटीपी हासिल करना तथा कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड और बैंक खाते के विवरण का पर्याप्त मिलान नहीं होना शामिल है।
जांच एजेंसियां इन खामियों के जरिए सरकारी भुगतान में कथित हेरफेर की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। कुछ प्रकरणों में सरकारी राशि के दुरुपयोग से संपत्ति खरीदने तथा अन्य गतिविधियों में रकम लगाए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। मामले के अलग-अलग प्रकरणों में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच की जानकारी भी सामने आई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे