ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल में दाखिल कराने समन्वय से कार्य करें : डॉ निवेदिता शर्मा
- मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने जिला स्तरीय समन्वय बैठक में दिए निर्देश
श्योपुर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा ने कहा कि स्कूल से ड्रॉप आउट बच्चों को पुनः स्कूल में दाखिल कराने के लिए शिक्षा, ट्रायबल, जिला शिक्षा केन्द्र, महिला बाल विकास सभी समन्वय से कार्य करें। इस क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओं का सहयोग भी लें। एक माह से अधिक स्कूल से अनुपस्थित बच्चों की सूची श्रम विभाग को उपलब्ध कराई जायें तथा सत्यापन सुनिश्चित किया जाये कि कहीं बच्चे बाल श्रम में संलग्न तो नहीं है।
डॉ. निवेदिता शर्मा ने यह निर्देश गुरुवार को श्योपुर जिले के प्रवास के दौरान कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित विभागीय स्टेक होल्डर्स की जिला स्तरीय समन्वय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने बालश्रम के विरूद्ध टॉस्क फोर्स के माध्यम से कडी कार्यवाही करने के निर्देश भी श्रम विभाग के अधिकारियों को दिये।
बैठक में डिप्टी कलेक्टर मेघा तिवारी, एडिशनल एसपी प्रवीण भूरिया, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अर्चना भूषण, सदस्य उषा दातरे, गणेश पाराशर, गौरव आचार्य, सतीश अवस्थी, महिला बाल विकास अधिकारी श्यामबाबू खरे, डीपीसी भूपेन्द्र शर्मा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ जेएन सक्सैना, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण राकेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी तथा एनजीओ जनसाहस, परिवार, प्रथम, चाइल्डलाइन आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा ने कहा कि बाल विवाह के प्रति समुदाय को जागरूक करने का कार्य किया जायें तथा संबंधित विभाग एवं एनजीओं समन्वय करके बाल विवाह को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए कार्य करें। सामूहिक विवाह सम्मेलनों में होने वाले विवाहों के पूर्व वर-वधुओं की उम्र के सत्यापन के संबंध में दस्तावेज प्राप्त किये जाएं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 6 वर्ष तक की आयु के मूकबधिर बच्चों के लिए निशुल्क रूप से कॉकलीयर इंप्लांट कराया जाता है, इस प्रकार के बच्चे यदि जिले में हो तो उनका सर्वे कर उक्त योजना के तहत बच्चों का निशुल्क ऑपरेशन कराये जायें, जिससे वे सामान्य बच्चों की तरह अपना जीवन जी सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उक्त योजना के तहत 9 बच्चों के कॉकलीयर इंप्लांट कराये गये है।
बैठक के दौरान बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण की स्थिति तथा पॉक्सो एक्ट सहित बाल श्रम एवं बाल विवाह के सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत प्रकरणों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही प्रायवेट स्कूलों में संचालित होने वाले छात्रावासों, प्राथमिक स्कूलों तथा मदरसों के नवीनीकरण के सत्यापन करने के संबंध में भी निर्देश दिये गये। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को एनजीओ द्वारा संचालित नशामुक्ति केन्द्र में बालको के लिए अलग से कक्ष निर्धारित कराने हेतु भी निर्देशित किया गया।
इस अवसर पर महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी श्यामबाबू खरे ने बताया कि जिले में संचालित तीनों एनआरसी में 88.5 प्रतिशत ऑक्यूपेन्सी है, इस साल अभी तक 637 बच्चों को एनआरसी के माध्यम से पोषण स्वास्थ्य का लाभ दिया गया है।
अंजुमन में संचालित मदरसे का निरीक्षण
मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा द्वारा अंजुमन इस्लाम संस्था द्वारा संचालित मदरसे का निरीक्षण किया गया तथा मदरसा संचालको को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत सभी प्रकार की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों से चर्चा की तथा पाठ्यपुस्तक का वाचन कराकर शैक्षणिक गुणवत्ता का आंकलन किया। इसके साथ ही मदरसे में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओ बिजली, पानी, शौचालय आदि के संबंध में भी जानकारी ली गई।
इस दौरान सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अर्चना भूषण, सदस्य गौरव आचार्य, डीपीसी भूपेन्द्र शर्मा तथा शिक्षा विभाग से मान सिंह परमार आदि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर