मप्र के 20 स्थानों पर शुकूर किये जा रहे हैं वेलनेस सेन्टर : प्रमुख सचिव शोभित जैन
- शासकीय स्वशासी अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय इंदौर का वार्षिक उत्सव अद्वैत-2026 का समापन
इंदौर, 18 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने कहा कि आयुष विभाग आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिये लगातार कार्य रहा है। शोध और नवाचार के कार्य किये जा रहे हैं। प्रदेश के 20 स्थानों पर मध्य प्रदेश टूरिज्म के माध्यम से वेलनेस सेन्टर शुरू किये जा रहे हैं।
प्रमुख सचिव जैन सोमवार को इंदौर के शासकीय स्वशासी अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव अद्वैत-2026 के समापन समारोह एवं पारितोषिक वितरण कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के विशेष अतिथि शिक्षाविद डॉ. प्रकाश शास्त्री एवं आयुष संचालनालय के उप संचालक डॉ. राजीव मिश्रा थे। कार्यक्रम में वार्षिक उत्सव में आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र एवं ट्राफी देकर पुरस्कृत किया गया।
प्रमुख सचिव शोभित जैन ने कहा कि आगामी 10 वर्ष आयुर्वेद के लिये बहुत महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। आयुर्वेद की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिये आयुर्वेद के विद्यार्थी और शिक्षकों को लगातार कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद जीवन विज्ञान है, जो वैज्ञानिक कसौटी पर हमेशा खरा उतरा है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति एक ऐसी पद्धति है जो स्वस्थ व्यक्ति की रक्षा करती है और व्यक्ति को बीमार नहीं होने देती है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में जो नाड़ी विशेषज्ञ होते हैं, उनका अनुमान करीब 80 प्रतिशत तक सही होता है। उन्होंने पुरस्कृत विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सफलता के लिये लगातार प्रयास करें और असफल होने पर हतोत्साहित नहीं हो।
डॉ. प्रकाश शास्त्री ने कहा कि आयुर्वेद की जड़ें भारत में है और इसे मुख्यधारा में लाना हम सबका दायित्व है। भारत का दर्शन है कि वह सबके कल्याण की बात करता है। इसलिए हमारे यहां सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे भवन्तु निरामय: कहा गया है। जो भारतीय है वह सेवाभावी है। कोरोना काल में भारत ने दुनिया के 180 देशों को वैक्सीन देकर सिद्ध किया कि भारत दूसरों के कल्याण के लिये सदैव तत्पर है।
उन्होंने विद्यार्थियों को आव्हान किया कि सेवा के भाव को हमेशा जगाये रखें और संवेदनशीलता को कम नहीं होने दें। यह समय आगे बढ़ने का है और भारत को विश्वगुरू बनाना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी विवेक से कार्य करें और स्क्रीन टाईम को नियंत्रित रखें। केवल लाईक मिलना ही काफी नहीं है।
डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का दस्तावेजीकरण करने में छात्र आगे आयें। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में अधिक से अधिक नवाचार और रिसर्च की आवश्यकता है, ताकि इसकी प्रतिष्ठा बनी रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उदबोधन देते हुए आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजीतपाल सिंह चौहान ने कहा कि महाविद्यालय में इस वर्ष से तीन विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की शुरूआत होने जा रही है। संस्था में पंचकर्म, नेत्र रोग, ओजोन थैरेपी की बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध है। मरीजों के उपचार हेतू शाम के समय में भी ओपीडी खोली जा रही है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में हर्बल गार्डन है, जिममें विभिन्न प्रजातियों के 400 पौधे हैं। संस्था द्वारा एक निजी गार्डन को भी गोद लिया गया है और वहां भी अब औषधीय पौधे लगाये जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर