मप्र के अधिकांश जलाशयों में जलभराव की स्थिति संतोषजनकः मंत्री सिलावट

 


- जल संसाधन मंत्री सिलावट ने की जलाशयों में जलभराव स्थिति की समीक्षा

भोपाल, 30 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बुधवार को प्रदेश में वर्षा एवं जलाशयों में जलभराव की स्थिति की वृहद समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश जलाशयों में जलभराव की स्थिति संतोषजनक है।

मंत्री सिलावट ने कहा कि आगामी रबी सीजन की सिंचाई एवं पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध जल का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अधिक जलभराव वाले जलाशयों में सतत निगरानी रखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता के आधार पर अभी से जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक प्रदेश में कुल 908.30 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो दीर्घावधि औसत 949.50 मिलीमीटर की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत कम है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में 773.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो औसत से 12 प्रतिशत कम है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 1083.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो औसत से 4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने अधिकारियों को वर्षा की क्षेत्रवार स्थिति को ध्यान में रखते हुए जलाशयों के जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

54 प्रमुख बांधों में 89.32 प्रतिशत जलभराव

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के अंतर्गत 54 प्रमुख बांधों में वर्तमान में औसत जलभराव 89.32 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 95.13 प्रतिशत था, जबकि विगत पांच वर्षों का औसत 88.45 प्रतिशत रहा है। वर्तमान में 35 बांध 90 प्रतिशत से अधिक भरे हुए हैं। 9 बांधों में 75 से 90 प्रतिशत, 5 में 50 से 75 प्रतिशत, 4 में 25 से 50 प्रतिशत तथा एक बांध में 10 से 25 प्रतिशत जलभराव है। मंत्री सिलावट ने 90 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले 35 बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बांध में जलस्तर, पानी की आवक और निकासी की नियमित समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता के अनुसार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जल प्रबंधन किया जाए। बांधों के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दलों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए विशेष जल प्रबंधन

मंत्री सिलावट ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से कम वर्षा को देखते हुए उज्जैन तथा नर्मदा-ताप्ती बेसिन में उपलब्ध जल की विशेष समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में सिंचाई, पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए उपलब्ध जल का बेसिनवार एवं परियोजनावार जल बजट तैयार किया जाए। किसानों को सिंचाई के लिए संभावित जल उपलब्धता की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा में बताया गया कि बेसिनवार जलभराव की स्थिति में गंगा बेसिन 99 प्रतिशत, यमुना बेसिन 94 प्रतिशत तथा नर्मदा बेसिन 95 प्रतिशत है। चंबल-बेतवा एवं सागर बेसिन में 82-82 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 81 प्रतिशत, वैनगंगा में 80 प्रतिशत, उज्जैन में 71 प्रतिशत तथा नर्मदा-ताप्ती बेसिन में 57 प्रतिशत औसत जलभराव दर्ज किया गया है।

मंत्री सिलावट ने अधिकारियों से कहा कि मानसून समाप्त होने के बाद जलाशयों, बांधों, नहरों एवं जल वितरण प्रणालियों का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव की कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में स्थानीय जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर