मप्रः वायरल गर्ल पहुंची हाईकोर्ट, खुद को बताया बालिग, कहा- ओरिजनल बर्थ सर्टिफिकेट बदला गया

 


इंदौर, 20 मई (हि.स.)। प्रयागराज महाकुंभ की ‘वायरल गर्ल’ ने खुद को बालिग साबित करने के लिए बुधवार को अपने पति के साथ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी शादी को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए सरकारी जन्म प्रमाण पत्र में फर्जी बदलाव किए गए। उन्हें नाबालिग दिखाने की कोशिश की गई।

याचिका में कहा गया है कि मूल जन्म प्रमाण पत्र को बिना नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से हटा दिया गया। उसकी जगह कथित रूप से गलत जन्मतिथि दर्ज कर दी गई। साजिश कर नाबालिग दिखाया गया। मूल जन्म प्रमाण पत्र बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

याचिका के अनुसार, वायरल गर्ल की मुलाकात केरल में फिल्म शूटिंग के दौरान एक युवक से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। खरगोन जिले की रहने वाली लड़की पिछले साल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों के कारण चर्चा में आई थीं।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने जताई थी आपत्ति

मामला उस समय विवादों में आया, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने विवाह पर आपत्ति जताई। आयोग का दावा था कि शादी के समय वायरल गर्ल की उम्र 16 वर्ष थी और विवाह के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद खरगोन पुलिस ने वायरल गर्ल के पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि, 20 अप्रैल 2026 को केरल उच्च न्यायालय ने युवक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पिता और कुछ अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर पति के खिलाफ भड़काऊ और द्वेषपूर्ण प्रचार किया। व्यक्तिगत विवाह को ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील शब्दों से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, ताकि सामाजिक माहौल प्रभावित हो सके। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह उनका निजी और कानूनी विवाह है, लेकिन इसे सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

वायरल गर्ल के वकील बीएल नागर ने आरोप लगाया कि पिता ने विवाह का विरोध करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्र में फर्जी बदलाव करवाए। मूल दस्तावेज को सरकारी पोर्टल से हटाकर नया रिकॉर्ड तैयार किया गया, ताकि उन्हें कानूनन नाबालिग साबित किया जा सके।

वकील के मुताबिक, शादी के समय वायरल गर्ल बालिग थीं। दोनों ने अपनी मर्जी से केरल में विवाह किया था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया, जिस पर केरल हाईकोर्ट पहले ही गिरफ्तारी पर रोक लगा चुका है।

याचिका में मांग की गई है कि मूल जन्म प्रमाण पत्र दोबारा बहाल किया जाए। बिना कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से दस्तावेज हटाने वाले लोगों के खिलाफ स्वतंत्र जांच कर कार्रवाई की जाए। इंदौर खंडपीठ में मामले पर जल्द सुनवाई हो सकती है।

बता दें कि वायरल गर्ल ने 29 अप्रैल 2026 को डायरेक्टर सनोज मिश्रा और तीन अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में एफआईआर कराई थी। इसके बाद केरल की एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने केस दर्ज जांच शुरू की थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि जब वह नाबालिग थी, तब डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' की शूटिंग के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार किया था। मिश्रा ने उसे एक्टिंग के मौके देने का झांसा देकर उसका शोषण किया। आरोपियों में केरल के विहिप नेता और वकील अनिल विलायल भी शामिल हैं। पीड़िता ने उन पर सोशल मीडिया पर बदनामी करने का आरोप लगाया है। दो अन्य आरोपियों के नामों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है।

उधर, फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने इन आरोपों को सोची-समझी साजिश बताया है। दावा किया कि उन्हें 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई थी। मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनकी फिल्म की अभिनेत्री को बहला-फुसलाकर केरल पहुंचाया गया। नाबालिग लड़की से फर्जी कागजों के आधार पर शादी की गई। अब मामले में आवाज उठाने पर उन्हें ही झूठे केस में फंसाया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर