उज्जैनः सिंहस्थ के लिए 189 करोड़ की रेल परियोजना का विरोध, किसानों ने सर्वे टीम को खाली हाथ लौटाया

 


- किसान बोले- तीन-चार करोड़ की बीघा जमीन का 60 लाख मुआवजा मंजूर नहीं

उज्जैन, 06 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित 189 करोड़ रुपये की रेलवे बायपास परियोजना को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव शुरू हो गया है। शुक्रवार को नईखेड़ी से चिंतामन तक 8.60 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का सर्वे करने पहुंची टीम को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। नाराज किसानों ने टीम को घेर लिया, जिसके बाद तहसीलदार, पटवारी और रेलवे अधिकारियों को बिना सर्वे किए लौटना पड़ा।

प्रस्तावित लाइन के लिए दाउदखेड़ी, चिंतामन, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बा क्षेत्र के 85 सर्वे नंबरों की जमीन चिह्नित की जा रही है। किसानों का आरोप है कि रेलवे चार-पांच बार अलाइनमेंट बदल चुका है। अब उनके खेतों से लाइन निकालने की तैयारी है, जबकि प्रभावित किसानों को न तो जमीन अधिग्रहण का स्पष्ट ब्यौरा दिया गया है और न ही मुआवजे की लिखित जानकारी।

किसानों का कहना है कि क्षेत्र में एक बीघा जमीन की बाजार कीमत 3 से 4 करोड़ रुपये है, जबकि 15 लाख रुपये की सरकारी गाइडलाइन के आधार पर चार गुना यानी करीब 60 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि आसपास सात कॉलोनियां और बड़े होटल विकसित हो चुके हैं। प्लॉट की कीमत करीब चार हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है।

किसान चाहते हैं कि सभी 85 प्रभावित किसानों को एक साथ बुलाकर रेलवे और प्रशासन अलाइनमेंट, अधिग्रहित होने वाली जमीन और मुआवजे की गणना का पूरा विवरण सार्वजनिक करें। किसान जीतसिंह फौजी ने आरोप लगाया कि टीम बिना पूर्व सूचना और नोटिस के सर्वे करने पहुंची थी। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन देने के विरोध में नहीं, बल्कि उचित जानकारी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

किसानों ने रेल लाइन के अलाइनमेंट को लेकर अदालत में भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि रेलवे अधिकारियों ने जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है। इसके बावजूद शुक्रवार को सर्वे शुरू करने की कोशिश की गई। किसानों के मुताबिक, पहले ऐसे वैकल्पिक रास्तों पर विचार हुआ था, जिनमें कम जमीन और कम लागत की जरूरत पड़ती।

नायब तहसीलदार दीप्ति मांझी ने बताया कि टीम खेतों में मौजूद ट्यूबवेल, पेड़ और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करने पहुंची थी। किसान मुआवजे से जुड़ी जानकारी चाहते थे। उन्हें दिवाली के बाद कार्यालय बुलाकर पूरा विवरण देने की बात कही गई थी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र और मुख्य सड़क की गाइडलाइन दरों में अंतर होने के कारण मुआवजे को लेकर आपत्ति है।

गौरतलब है कि सिंहस्थ के दौरान ट्रेनों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए चिंतामन से नईखेड़ी तक 8.60 किलोमीटर लंबी बायपास रेल लाइन प्रस्तावित है। इस पर 189.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके बनने से इंदौर से नागदा जाने वाली ट्रेनें उज्जैन स्टेशन आए बिना सीधे निकल सकेंगी। इससे इंजन बदलने और ट्रेन रिवर्सल में लगने वाला समय बचेगा। रेलवे को उम्मीद है कि परियोजना से उज्जैन स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव करीब 30 प्रतिशत कम होगा। हालांकि, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे पर किसानों की नाराजगी ने परियोजना के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर