उज्जैनः नगर निगम ने खड़े हनुमान की मूर्ति हटाने के लिए आईआईटी इंदौर से मांगी मदद

 




उज्जैन, 09 सितम्बर (हि.स.)। ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच एक प्राचीन हनुमान मूर्ति को सुरक्षित स्थानांतरित करने की प्रशासनिक अथक परिश्रम और कवायद लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को हटाना नगर निगम और जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब हनुमान जी की मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम से मदद मांगी गई है।

दरअसल, उज्जैन शहर में कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक जारी सड़क चौड़ीकरण की जद में आए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को हटाने के लिए पिछले छह दिनों से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मूर्ति अपनी जगह से हिल नहीं सकी है। क्रेन और अन्य साधनों के इस्तेमाल के बाद भी जब प्रतिमा को हटाना संभव नहीं हुआ तो नगर निगम ने आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम को उज्जैन बुलाया।

बेसाल्ट पत्थर से बनी परमार कालीन मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाने के लिए बुधवार को उज्जैन पहुंची आईआईटी की टीम आधुनिक उपकरणों से मूर्ति की गहराई की जांच कर रही है, ताकि आस्था और तकनीक दोनों का सम्मान करते हुए आगे का फैसला लिया जा सके। अब मंदिर पर लगातार भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। बुधवार को भी सुबह से ही देर शाम लंबी कतारें देखी गईं।

उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने कहा कि आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की टीम को पुजारी के अनुरोध पर बुलाया गया था। मूर्ति को दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया और तारीख अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही तय की जाएगी। हम यह पता लगा रहे हैं कि क्या मूर्ति को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से हटाया जा सकता है?

आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की टीम ने खास उपकरणों का इस्तेमाल करके मूर्ति की गहराई और आसपास की मिट्टी की जांच की। परमार वंश के समय की बड़ी मूर्तियां अक्सर इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल करके लगाई जाती थीं। 'खड़े हनुमान' की मूर्ति मालवा क्षेत्र के मजबूत बेसाल्ट पत्थर से तराशी गई है।

आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों से कराएं जांच

मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने कहा कि मुझे प्रशासन की कार्रवाई से कोई आपत्ति नहीं है। मैं चाहता हूं कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से मूर्ति की जांच की जाए और सही जांच के बाद ही इसे दूसरी जगह ले जाया जाए। स्थानीय लोगों ने भी नगर निगम कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर यही मांग की। अधिकारियों ने बताया कि पुजारी के अनुरोध पर IIT इंदौर की एक टीम ने मंगलवार को मूर्ति का निरीक्षण किया।

इस बीच उज्जैन जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि श्रद्धालुओं की भावना के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। किसी की भी आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। मंदिर और प्रतिमा अन्य जगह स्थापना का कार्य बगैर सहमति के नहीं होगा।

एसडीएम एलएन गर्ग ने कहा कि खड़े हनुमान जी से संबंधित विषय में प्रशासन सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों की भावनाओं का पूर्ण सम्मान करता है। सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य महत्वपूर्ण हैं। साथ ही उज्जैन की आस्था और विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रशासन श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों के साथ संवाद कर सर्वसम्मति से समाधान निकालेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर