मप्रः दो दिवसीय पुलिस महानिरीक्षक जोन की त्रैमासिक समीक्षा बैठक संपन्न

 




- डीजीपी ने दिए सुशासन, जवाबदेही, ड्रग फ्री मध्य प्रदेश एवं प्रभावी पुलिसिंग के निर्देश

भोपाल, 14 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय में आयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक तथा विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की दो दिवसीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हुई।

बैठक के समापन अवसर पर डीजीपी मकवाणा ने प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग, प्रशासनिक दक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार प्रदान किया जाना है, उनके प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर दायित्व सौंपे जाएं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति आए और कर्मचारियों का मनोबल बढ़े।

डीजीपी ने सभी इकाइयों को लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों, रिट याचिकाओं तथा स्थगन आदेशों की स्थिति की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की जाए तथा समय-सीमा में जवाब दावा एवं आवश्यक अभिमत प्रस्तुत कर प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि सभी कार्यालयीन कार्यों को अधिकतम रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से भारमुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए।

डीजीपी ने विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निराकरण, उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों, विशेषकर के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है, जिससे पुलिस बल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं कार्य संस्कृति विकसित हो सके।

उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर उनका प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें।

सीसीटीवी नेटवर्क, सेफगार्ड योजना एवं संसाधन प्रबंधन पर विशेष जोर

डीजीपी मकवाणा ने निर्देशित किया कि प्रदेश में स्थापित सभी सीसीटीवी कैमरे सदैव चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। सेफ सिटी, टेलीकॉम तथा थाना सीसीटीवी योजनाओं का प्रभावी संचालन अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की पहचान में किया जाए। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाए।सेफगार्ड योजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित लगभग एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाए, जिसका उपयोग कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन एवं अपराध नियंत्रण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके।

उन्होंने उपलब्ध मानव संसाधनों के समुचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल देते हुए निर्देशित किया कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर पर पदस्थापना की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार संसाधनों का पुनर्विन्यास किया जाए। उन्होंने पुराने अभिलेख एवं आदेशों की समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने सभी जिलों को पुलिस भूमि एवं परिसंपत्तियों का व्यवस्थित जिलेवार प्रबंधन सुनिश्चित करने, पुलिस भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने तथा वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के निर्देश दिए।

विभिन्न शाखाओं की कार्यप्रणाली एवं अपराध नियंत्रण की हुई विस्तृत समीक्षा

दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, विसबलजोनों के अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा कर प्रभावी पुलिसिंग के लिए रणनीति तैयार करना था।

समीक्षा के दौरान मध्य प्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत अपराध विश्लेषण की विस्तृत समीक्षा की गई। इसमें महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती तथा मॉबलिंचिंग जैसी गंभीर घटनाओं की स्थिति का जोनवार एवं जिलावार विश्लेषण किया गया। अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों एवं आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा हुई।

न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय में लंबित मामलों, अवमानना प्रकरणों, सेवा संबंधी दावों, रिट याचिकाओं, स्थगन आदेशों तथा समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को न्यायालयीन मामलों की सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों तथा विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों से संबंधित लंबित प्रशासनिक मामलों की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त सूबेदार, निरीक्षक एवं रक्षित निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विगत छह माह में की गई कार्यवाहियों, चिन्हित ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों, मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, चिन्हित अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई, बॉर्डर मीटिंग्स एवं नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि 10 महत्वपूर्ण प्रकरणों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर