ट्विशा शर्मा मौत मामलाः गिरिबाला सिंह की जमानत पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

 


भोपाल, 24 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को विशेष अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब इस मामले में शनिवार को आदेश सुनाया जाएगा।

जमानत आवेदन सबसे पहले विशेष न्यायाधीश नीलम शुक्ला की अदालत में पेश हुआ। हालांकि, उन्होंने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। इसके बाद प्रकरण दोपहर करीब तीन बजे विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां विस्तृत सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि वह एक महिला हैं और उनकी उम्र भी अधिक है। ऐसे में मानवीय आधार पर उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति और आयु को देखते हुए उन्हें राहत दी जानी उचित होगी।

वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जमानत आवेदन का कड़ा विरोध किया। एजेंसी की ओर से अदालत को बताया गया कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत देना उचित नहीं होगा। सीबीआई ने यह भी तर्क दिया कि जिस प्रकरण की जांच चल रही है, उसमें मृतका भी एक महिला थी। इसलिए केवल लिंग के आधार पर राहत दिए जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। एजेंसी ने मामले की गंभीरता और जांच के विभिन्न पहलुओं का हवाला देते हुए जमानत अर्जी खारिज करने की मांग की।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश नीलम शुक्ला ने आरोपी गिरिबाला सिंह के साथ पूर्व पेशेवर संबंध का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। न्यायालय ने कहा कि ग्वालियर में गिरिबाला सिंह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहने के दौरान उन्होंने उनके अधीन न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था। निष्पक्षता की धारणा बनाए रखने के लिए जमानत याचिका को विशेष न्यायाधीश (लोकायुक्त) एवं प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां विस्तृत सुनवाई हुई।

बचाव पक्ष ने कहा कि गिरिबाला सिंह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं और जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। उनकी लगभग 100 वर्षीय माता उनकी देखभाल पर निर्भर हैं। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है, उनके जेल में रहने के दौरान घर में चोरी हुई तथा वह नियमित वेतन और युद्ध वीरांगना पेंशन प्राप्त करती हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होने के कारण दहेज मांगने का आरोप स्वाभाविक नहीं माना जा सकता।

सीबीआई और आपत्तिकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि महिला होना या आर्थिक रूप से संपन्न होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। अभियोजन ने जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश कर आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई। साथ ही कहा कि उच्च न्यायालय पहले अग्रिम जमानत निरस्त कर चुका है और जांच के दौरान आरोपी ने वॉयस सैंपल देने से भी इनकार किया था।

अभियोजन ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह पर जांच को प्रभावित करने के आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने मामले से जुड़े सीसीटीवी तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क किया तथा सीसीटीवी फुटेज हासिल करने के लिए अपना निजी प्रतिनिधि भेजा। सीबीआई ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं या जांच में बाधा डाल सकती हैं।

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र ने आदेश सुरक्षित रखने की घोषणा की। अब शनिवार को अदालत यह तय करेगी कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलेगी या उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।

सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन की ओर से गिरिबाला सिंह की मेडिकल रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में उन्हें पूरी तरह स्वस्थ बताया गया। इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी आधार पर राहत देने की दलील भी बहस का हिस्सा रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर