सच्चा विश्वास और समर्पण मनुष्य को हर मुश्किल परिस्थिति से सहजता से निकाल लेता है बाहर: पंडित प्रदीप मिश्रा
- सात दिवसीय भागवत कथा में पहले ही दिन उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडाल पड़े छोटे, सड़कों और गलियों तक पहुंची कथा की गूंज
सीहोर, 20 सितम्बर (हि.स.)। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सच्चा विश्वास और समर्पण मनुष्य को हर मुश्किल परिस्थिति से सहजता से बाहर निकाल लेता है। भागवत कथा अनादि काल से भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र रही है। इसके माध्यम से भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना बढ़ती है।
पंडित प्रदीप मिश्रा रविवार को मध्य प्रदेश के सीहोर शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला मंडल द्वारा आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। कथा के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ी कि कथा के लिए लगाए गए पंडाल छोटे पड़ गए। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल के बाहर सड़क, गली और आसपास उपलब्ध स्थानों पर बैठकर कथा का श्रवण करते नजर आए। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे-जैसे कथा का समय नजदीक आया, धर्मशाला परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई।
श्री सत्यनारायण मंदिर से निकली शोभायात्रा, पुष्प वर्षा से हुआ स्वागत
सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ रविवार को सादगीपूर्ण वातावरण में शोभायात्रा के साथ किया गया। शोभायात्रा शहर के श्री सत्यनारायण मंदिर से प्रारंभ होकर खजांची लाइन स्थित श्रीजी मंदिर पहुंची। इसके बाद यात्रा कथा स्थल अग्रवाल धर्मशाला पहुंची। शोभायात्रा के मार्ग में क्षेत्रवासियों ने श्रद्धा के साथ पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। धार्मिक ध्वज और भक्ति के वातावरण के बीच निकली शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कथा स्थल पहुंचने के बाद विधिवत भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से आयोजन स्थल पर जगह कम पड़ गई। पंडाल के अंदर स्थान नहीं मिलने पर श्रद्धालु बाहर सड़क और आसपास की गलियों में बैठकर कथा सुनते रहे। कई श्रद्धालुओं ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कथा का श्रवण किया।
सैकड़ों किलोमीटर दूर से पहुंचे श्रद्धालु
भागवत कथा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग कथा सुनने पहुंचे। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पंडित प्रदीप मिश्रा के दर्शन और कथा का श्रवण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए हैं। कथा स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और प्रसन्नता के भाव नजर आए। श्रद्धालु पूरे भाव के साथ कथा का श्रवण करते रहे। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पंडाल के साथ-साथ बाहर बैठे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष रुकमणी रोहिला ने बताया कि पहले दिन श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से अधिक रही। श्रद्धालुओं को कथा सुनने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पंडाल का विस्तार किया जा रहा है। एलईडी स्क्रीन भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बाहर बैठने वाले श्रद्धालु भी सहजता से कथा का श्रवण कर सकें।
भागवत कथा के प्रथम दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण कराया था। राजा परीक्षित ने भी पूरे भाव के साथ कथा को सुना और उसका मनन किया। भागवत कथा की महिमा ऐसी है कि आज भी श्रद्धालु इसे सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं और कथा स्थल तक खिंचे चले आते हैं।
पंडित मिश्रा ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का सुमिरन करता है, भगवान उसके अंत:करण में प्रकट होते हैं। भगवान को छल-कपट प्रिय नहीं है। उन्हें निष्कपट, सरल और सहज मन वाले लोग प्रिय होते हैं। इसलिए भगवान के प्रति मनुष्य को सहज रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में अपनी बुद्धि का अहंकार नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए।
भक्ति में सरलता और निष्कपट भाव जरूरी
कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान के प्रति भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। मनुष्य को सरल और सहज भाव से भगवान का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मन में विश्वास और समर्पण होता है, तब कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। भागवत कथा के संदेश को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए उसे अपने जीवन में उतारने की बात कही। कथा के दौरान श्रद्धालु एकाग्र होकर उनके विचारों को सुनते रहे।
27 वर्षों से जारी है आस्था का यह सिलसिला
अग्रवाल महिला मंडल द्वारा भादों माह में आयोजित होने वाली भागवत कथा पिछले 27 वर्षों से लगातार श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। शहर की धार्मिक परंपरा में इस कथा का अपना विशेष स्थान है। हर वर्ष महिला मंडलों और क्षेत्रवासियों को इस आयोजन का इंतजार रहता है। यह केवल कथा का आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही श्रद्धा, भक्ति और अपनेपन की परंपरा है। कथा स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन से जुड़कर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। पहले ही दिन उमड़ी भीड़ ने आयोजन के प्रति लोगों की आस्था को एक बार फिर सामने रखा। सात दिनों तक चलने वाली कथा में आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर