सच्चे भक्त को सांसारिक सुख या मोक्ष की चाह नहीं, प्रभु से सहज स्नेह ही पर्याप्त: पंडित प्रदीप मिश्रा

 


- भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा आस्था का सैलाब

सीहोर, 21 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सच्चे भक्त को भगवान से सांसारिक सुख की चाह नहीं होती और न ही वह मोक्ष की कामना को लेकर भक्ति करता है। उसके मन में केवल प्रभु के प्रति सहज स्नेह और समर्पण होता है। भक्ति में भटकाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की खोज में इधर-उधर भटकने के बजाय मनुष्य को भगवान के प्रति विश्वास और आस्था बनाए रखनी चाहिए। जब मन में सच्ची श्रद्धा और विश्वास होता है, तब भक्ति का मार्ग सहज हो जाता है। भगवान के प्रति निष्कपट भाव से की गई भक्ति मनुष्य के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।

पंडित प्रदीप मिश्रा सोमवार को मध्य प्रदेश के सीहोर शहर में बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित भागवत कथा को संबोधित कर रहे थे। अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मौसम में उतार-चढ़ाव और शाम को हुई बारिश की बौछारों के बावजूद सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए सुबह से ही कथा स्थल पर पहुंचने लगे थे। पंडाल के अंदर और बाहर श्रद्धालुओं ने बैठकर पूरे भाव और एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण किया।

लगातार 27 वर्षों से आयोजित हो रही इस भागवत कथा को लेकर शहरवासियों में विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। सोमवार को कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और जीवन के उद्देश्य से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाती है

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जो कथा मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य सिखाकर त्याग एवं तपस्या के मार्ग से मोक्ष की ओर ले जाए, वह भागवत कथा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रामायण मनुष्य को जीवन जीने की सीख देती है, महाभारत जीवन की परिस्थितियों में व्यवहार और आचरण का बोध कराता है तथा गीता कर्म करने का संदेश देती है, उसी प्रकार भागवत कथा मनुष्य को जीवन के अंतिम सत्य को समझने की दिशा देती है।

उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम समय में मनुष्य को किस प्रकार अपने आचरण और कर्मों पर ध्यान देना चाहिए, इसका बोध भी भागवत कथा के माध्यम से होता है। कथा केवल धार्मिक श्रवण तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को समझने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा भी देती है। कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जो व्यक्ति जीवन में आने वाली समस्याओं से भागता है, समस्याएं उसका पीछा नहीं छोड़तीं। इसलिए समस्याओं से भागने के बजाय उनका सामना करते हुए उन पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन मनुष्य को धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ उनका सामना करना चाहिए। भागवत कथा मनुष्य को इसी प्रकार की जीवन-दृष्टि प्रदान करती है।

जहां शिव हैं, वहीं कृष्ण भी हैं

भगवान शिव के चरित्र का वर्णन करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि पुरुष और प्रकृति के बीच सामंजस्य से ही सृष्टि का संचालन सुचारु रूप से होता है। उन्होंने भगवान शिव को पुरुष और माता पार्वती को प्रकृति का प्रतीक बताते हुए कहा कि दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि पुरुष और प्रकृति के बीच संतुलन नहीं हो तो सृष्टि का कोई भी कार्य व्यवस्थित रूप से संपन्न नहीं हो सकता। इसी प्रसंग के माध्यम से उन्होंने भगवान शिव और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के संबंध को भी समझाया और कहा कि जहां भी शिव हैं, वहीं कृष्ण भी हैं। शिव चरित्र के प्रसंगों के दौरान कथा स्थल पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते रहे। बीच-बीच में भजनों और धार्मिक जयकारों से वातावरण भक्तिमय होता रहा।

आज होगा वामन अवतार का वर्णन, सजाई जाएगी झांकी

अग्रवाल महिला मंडल ने बताया कि मंगलवार को भागवत कथा में भगवान के वामन अवतार का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर वामन अवतार की आकर्षक झांकी भी सजाई जाएगी। श्रद्धालुओं को भगवान के इस स्वरूप के दर्शन कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ग्यारस के अवसर पर कथा स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए फलाहारी प्रसादी का वितरण भी किया जाएगा। इसके लिए आयोजन समिति की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

सुबह से पहुंचते हैं श्रद्धालु, बारिश भी नहीं रोक पाई आस्था

भागवत कथा में शामिल होने के लिए शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु सुबह से ही कथा स्थल पर पहुंचकर अपने लिए स्थान सुरक्षित कर लेते हैं। कथा के दौरान पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है और बड़ी संख्या में लोग बाहर बैठकर भी कथा का श्रवण करते हैं। सोमवार को शाम के समय हुई बारिश की बौछारों से कुछ देर के लिए मौसम सुहाना हुआ, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। बारिश के बीच भी श्रद्धालु कथा सुनते रहे। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

27 वर्षों से जारी है भागवत कथा की परंपरा

अग्रवाल महिला मंडल द्वारा भादों माह में आयोजित होने वाली यह भागवत कथा लगातार 27 वर्षों से आयोजित की जा रही है। वर्षों से चल रही इस परंपरा के कारण कथा शहर के धार्मिक आयोजनों में विशेष स्थान रखती है। हर वर्ष श्रद्धालु इस कथा का इंतजार करते हैं और सात दिनों तक बड़ी संख्या में कथा स्थल पर पहुंचकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण करते हैं। आयोजक मंडल के अनुसार आगामी दिनों में भी कथा में विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। मंगलवार को वामन अवतार की झांकी और फलाहारी प्रसादी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर